SHRI GANESH SAHASTRANAAM/NIYAM/VIDHI/BENEFITS

  1. शारीरिक शुद्धि:

    • प्रातः स्नान कर के शुद्ध एवं स्वच्छ वस्त्र पहनें।

    • विशेष रूप से सफेद, पीला या लाल रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।

  2. स्थान की शुद्धता:

    • पाठ करने का स्थान साफ-सुथरा और शांतिपूर्ण होना चाहिए।

    • वहां एक चौकी पर श्री गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

  3. मन की शुद्धि:

    • पाठ से पहले मन को शांत करें।

    • नकारात्मक विचारों से बचें और भक्ति भाव से भरपूर रहें।

  4. भोजन में सात्विकता:

    • केवल सात्विक और शुद्ध भोजन करें।

    • पाठ काल में मांसाहार, मद्यपान और तामसिक आहार का त्याग करें।

  5. समय का नियम:

    • प्रातः काल (ब्रह्म मुहूर्त) सबसे उत्तम है।

    • चतुर्थी, गणेश चतुर्थी, मंगलवार, बुधवार के दिन विशेष फल मिलता है।

    • संकटों से बचने के लिए किसी भी शुभ दिन से आरंभ कर सकते हैं।

  6. आसन और दिशा:

    • ऊन या कुश का आसन बिछाकर बैठें।

    • पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पाठ करें।

  7. नियमितता:

    • यदि पाठ को एक साधना के रूप में किया जा रहा है (जैसे 11, 21, 40 दिनों का व्रत), तो लगातार बिना बाधा के करना चाहिए।

विधि (Vidhi)

  1. संकल्प (Sankalp):

    • पाठ प्रारंभ करने से पहले संकल्प करें:
      (“मैं अपने समस्त विघ्नों के नाश और सुख-समृद्धि प्राप्ति के लिए श्री गणेश सहस्रनाम का पाठ करूँगा/करूँगी।”)

  2. आचमन और शुद्धि:

    • जल से आचमन कर अपने शरीर और मन को शुद्ध करें।

  3. धूप, दीप, नैवेद्य अर्पण:

    • श्री गणेश जी के समक्ष दीपक, अगरबत्ती, फूल और नैवेद्य (मोदक, दूर्वा, लड्डू आदि) अर्पित करें।

  4. गणपति ध्यान (Dhyana):

    • श्री गणेश जी के दिव्य स्वरूप का ध्यान करें:

      • गजमुखी, एकदंत, लड्डूप्रिय, मोदकधारी, मुषकवाहन।

  5. सहस्रनाम पाठ (Paath):

    • श्रद्धा और भावनापूर्वक 1000 नामों का उच्चारण करें।

    • प्रत्येक नाम का उच्चारण स्पष्ट और प्रेमपूर्वक करें।

  6. पुष्प अर्पण (Pushpanjali):

    • प्रत्येक नाम पर या प्रत्येक शतक (100 नामों) के बाद पुष्प अर्पित करें (यदि संभव हो)।

    • दूर्वा (तीन या पांच पत्तियों वाली) भी अर्पित करना अति शुभ होता है।

  7. पूर्णाहुति (Purnahuti):

    • पाठ के अंत में गणेश जी की आरती करें।

    • उन्हें मोदक, लड्डू आदि का भोग अर्पित करें और प्रसाद स्वरूप बांटें।

  8. क्षमा प्रार्थना (Kshama Prarthana):

    • पाठ के दौरान हुई किसी भी त्रुटि के लिए श्री गणेश जी से क्षमा याचना करें।

लाभ (Benefits)

  1. सभी विघ्नों का नाश:

    • जीवन के समस्त विघ्न, बाधाएँ, रुकावटें दूर होती हैं।

    • नए कार्यों की सफलता सुनिश्चित होती है।

  2. संकटों में रक्षा:

    • अचानक आने वाले संकटों, भय और दुर्घटनाओं से बचाव होता है।

  3. धन, वैभव और सुख-समृद्धि:

    • आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।

    • घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

  4. विद्या और बुद्धि में वृद्धि:

    • विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और ज्ञान साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी है।

    • मेधा शक्ति, स्मरण शक्ति और विवेक बढ़ता है।

  5. मानसिक शांति और आत्मबल:

    • तनाव, चिंता, भय आदि दूर होते हैं।

    • मनोबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

  6. कर्मों का शुद्धिकरण:

    • दुष्कर्मों का शमन होता है और शुभ कर्मों में प्रवृत्ति बढ़ती है।

  7. पारिवारिक सुख-संपत्ति:

    • घर में प्रेम, सामंजस्य और संतान सुख बढ़ता है।

    • वंश वृद्धि के इच्छुक साधकों को विशेष लाभ मिलता है।

  8. आध्यात्मिक उन्नति:

    • साधक को सिद्धि, ऋद्धि और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता मिलती है।

🌸 पाठ से पूर्व संकल्प मंत्र (बोल सकते हैं):

“मम समस्त विघ्न विनाशार्थं, सुख-समृद्धि सिद्ध्यर्थं, श्री गणेश सहस्रनाम पाठं करिष्ये।”

(अर्थ: “मैं अपने समस्त विघ्नों के नाश तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति हेतु श्री गणेश सहस्रनाम का पाठ करूँगा/करूँगी।”)

🌸

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