मंगला गौरी मंदिर गया में स्थित एक प्रमुख शक्तिपीठ है इसे 18 शक्ति पीठों में से एक प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है यह मंदिर माता मंगला गौरी को पूर्ण रूप से समर्पित है जो की शक्ति और कल्याण का प्रतीक है ऐसा माना जाता है कि यहां सती माता का वक्ष- स्थल गिरा था जिस कारण यह विशेष रूप से पूजनीय है
Table of Contents
Toggleमंगला गौरी व्रत की कथा
एक समय की बात है एक छोटे से गांव में एक साहूकार अपनी पत्नी के साथ रहता था साहूकार अत्यधिक धनवान था उसके घर में किसी भी प्रकार की कोई चीज की कमी नहीं थी फिर भी वह और उसकी पत्नी एक संतान न होने के कारण दिन-रात दुखी रहते थे संतान की कमी उन्हें हमेशा ही सताती थी
एक दिन की बात है उसे साहूकार के घर में साधुजन आए, साहूकार ने उनका अत्यधिक आदर्श सत्कार सद्भावना के साथ किया और उन्हें अपनी समस्या के विषय में बतलाया , साधु ने साहूकार की पत्नी को सावन में मंगलवार को किए जाने वाले मंगला गौरी व्रत करने का उपाय बताए सती पूजा की विधि के संपूर्ण जानकारी उनको दी,इसके पश्चात साहूकार की पत्नी ने जैसे ही सावन का महीना आया, पहले मंगलवार से ही मां गौरी मंगला का पूजन व्रत करना आरंभ कर दिया, अब वह हर मंगलवार को विधिपूर्वक व्रत करती और पूजा पाठ करने लग गई इस प्रकार कई महीनो तक उसने यह व्रत का पालन किया, एक दिन उसकी धर्म निष्ठा और सच्चे मन से की गई पूजा-आराधना से मां पार्वती ने प्रसन्न होकर भगवान शिव से साहूकार और उसकी पत्नी को संतान का सुख प्रदान करने के लिए वरदान देने के लिए आग्रह किया
साहूकार को उसे रात शब्द में एक दिव्य शक्ति में दर्शन दिया और कहा कि आम के पेड़ के नीचे भगवान गणेश की मूर्ति विराजित है तुम उसे पेड़ से आम तोड़कर के अपनी पत्नी को खिला देना इससे तुम्हें संतान सुख की प्राप्ति अवश्य होगी साहूकार में अगले दिन उठकर सुबह अपनी पत्नी को इस वक्त के बारे में बताया और वह आम के पेड़ को ढूंढने के लिए सुबह ही निकल पड़ा काफी समय ढूंढने के पश्चात अंततः उसे साहूकार को वह आम का पेड़ मिला जहां भगवान श्री गणेश की मूर्ति विराजित थी उसने आम तोड़ने के लिए जैसे ही पेड़ पर पत्थर मारना शुरू किया पत्थर फेंकने से एक आम तो टूटकर नीचे गिर गया लेकिन गलती से एक पत्थर जाकर भगवान गणेश की प्रतिमा को लग गया जिसे भगवान गणेश अत्यधिक क्रोधी हो गए और उन्होंने प्रकट होकर उसे साहूकार को श्राप दिया कि ही स्वार्थी मनुष्य तुमने अपने स्वास्थ्य के लिए मुझे कष्ट प्रदान किया है तुझे मां पार्वती की कृपा से संतान तो अवश्य प्राप्त होगी लेकिन उसकी मृत्यु 21 वर्ष की आयु में हो जाएगी यह सुनकर साहूकार अत्यधिक चिंतित हो गया और वापस घर चला गया उसने वह फल अपनी पत्नी को खिला दिया लेकिन इस घटना के विषय में उसे कुछ नहीं बतलाया उसने पश्चात भगवान शिव और माता पार्वती के आशीर्वाद से साहूकार और उसकी पत्नी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई पुत्र प्राप्त करके उनकी जिंदगी में खुशियां ही खुशियां भर गई लेकिन साथ ही साथ साहूकार को उसकी अल्प आयु के विषय में सोच सोच कर या चिंता सदैव सताती रही,
देखते ही देखते जैसे ही वह बालक 20 वर्ष का हो गया और व्यापार में अपने पिता का हाथ बताने लगा एक दिन लौटते समय साहूकार पेट की छाया में तालाब किनारे बैठकर अपने पुत्र के साथ भोजन ग्रहण कर रहा था तभी वहां कमला और मंगला नामक दो कन्याएं कपड़े धोने के लिए आए और कपड़े धोते हुए आपस में बात कर रही थी कमला ने मंगला से कहा कि मैं इस सावन में प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखने का निश्चय किया है तुम भी मां पार्वती के समक्ष या व्रत अवश्य करना , इससे माँ पार्वती प्रसन्न होती है और उसे पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखती है इसे करने से मनवांछित पर और अखंड सौभाग्य सदैव बना रहता है
यह बात सुनकर मंगला भी इस व्रत को करने के लिए मान गई दूसरी ओर साहूकार में इन दोनों कन्याओं का संवाद सुन लिया और अपने मन में यह सोचने लगा की कन्या मंगला गौरी व्रत को करती है उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होगी यह मेरे पुत्र के लिए एक योग्य वधू हो सकती है ऐसा सोचकर वह दोनों के विवाह का प्रस्ताव कन्या के पिता के पास लेकर गया साहूकार के गांव में प्रतिष्ठा और मान-सम्मान के कारण कमला के पिता अपनी पुत्री का विवाह साहूकार के लड़के से करवाने के लिए राजी हो जाते हैं विवाह के पश्चात भी कमला विधिपूर्वक मंगला गौरी का व्रत का पालन भली प्रकार करती है उसके इस भक्ति भाव से प्रसन्न होकर माता पार्वती उसे सपने में दर्शन देती है और उसे कहने लगी कि मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूं
मंगला गौरी चालीसा
जो भी विवाहित महिलाएं सावन के महीने में मंगला गौरी के व्रत को पूर्ण विधि विधान के साथ रखती हैं और मन मंगला गौरी की पूजा अर्चना करती हैं उनको पूजा व्रत कथा करने के साथ ही साथ पार्वती चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए मन मंगला गौरी को शक्ति पुरुष पार्वती का रूप मन जाता है पौराणिक कथाओं के अनुसार मंगला गौरी व्रत को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है
॥ दोहा
मन मंदिर मेरे आन बसो,
आरम्भ करूं गुणगान।
गौरी माँ मातेश्वरी,
दो चरणों का ध्यान॥
पूजन विधी न जानती,
पर श्रद्धा है आपर।
प्रणाम मेरा स्विकारिये,
हे माँ प्राण आधार॥
॥ चौपाई ॥
नमो नमो हे गौरी माता,
आप हो मेरी भाग्य विधाता।
शरनागत न कभी गभराता,
गौरी उमा शंकरी माता॥
आपका प्रिय है आदर पाता,
जय हो कार्तिकेय गणेश की माता।
महादेव गणपति संग आओ,
मेरे सकल कलेश मिटाओ॥
सार्थक हो जाए जग में जीना,
सत्कर्मो से कभी हटु ना।
सकल मनोरथ पूर्ण कीजो,
सुख सुविधा वरदान में दीज्यो॥
हे माँ भाग्य रेखा जगा दो,
मन भावन सुयोग मिला दो।
मन को भाए वो वर चाहु,
ससुराल पक्ष का स्नेह मैं पायु॥
परम आराध्या आप हो मेरी,
फिर क्यूं वर में इतनी देरी।
हमारा काम पूरा करो,
थोड़े में बरकत भर दीजियो॥
अपनी दया बनाए रखना,
भक्ति भाव जगाये रखना।
गौरी माता अनसन रहना,
कभी न खोयूं मन का चैना॥
देव मुनि सब शीश नवाते,
सुख सुविधा को वर में पाते।
श्रद्धा भाव जो लेकर आया,
बिन मांगे भी सब कुछ पाया॥
हर संकट से उसे उबारा,
आगे बढ़ के दिया सहारा।
जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे,
हताश मन को आशा में जीना चाहिए।
शिव भी आपका कहा ना टाले,
दया दृष्टि हम पे डाले।
जो जन करता आपका ध्यान,
जग मे पाए मान सम्मान॥
सच्चे मन जो सुमिरन करती,
उसके सुहाग की रक्षा करती।
दया दृष्टि जब माँ डाले,
भव सागर से पार उतारे॥
जपे जो ओम नमः शिवाय,
शिव परिवार का स्नेहा वो पाए।
जिसपे आप दया दिखावे,
दुष्ट आत्मा नहीं सतावे॥
सात गुण की हो दाता आप,
हर इक मन की ज्ञाता आप।
काटो हमरे सकल कलेश,
निरोग रहे परिवार हमेश॥
दुःख संताप मिटा देना माँ,
मेघ दया के बरसा देना माँ।
जबही आप मौज में आय,
हठ जय माँ सब विपदाएं॥
जिस पे दयाल हो माता आप,
उसका बढ़ता पुण्य प्रताप।
फल-फूल मैं दुग्ध चढ़ाऊ,
श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु॥
अवगुन मेरे ढक देना माँ,
ममता आंचल कर देना माँ।
कठिन नहीं कुछ आपको माता,
जग ठुकराया दया को पाता॥
बिन पाऊ न गुन माँ तेरे,
नाम धाम स्वरूप बहू तेरे।
जितने आपके पावन धाम,
सब धामो को माँ प्राणम॥
आपकी दया का है ना पार,
तभी को पूजे कुल संसार।
निर्मल मन जो शरण में आता,
मुक्ति की वो युक्ति पाता॥
संतोष धन्न से दामन भर दो,
असम्भव को माँ सम्भव कर दो।
आपकी दया के भारे,
सुखी बसे मेरा परिवार॥
आपकी महिमा अति निराली,
भक्तो के दुःख हरने वाली।
मनोकामना पुरन करती,
मन की दुविधा पल मे हरती॥
चालीसा जो भी पढ़े सुनाए,
सुयोग वर वरदान मे पाए।
आशा पूर्ण कर देना माँ,
सुमंगल साखी वर देना माँ॥
गौरी चालीसा के लाभ
यदि किसी की वैवाहिक समस्याएं चल रही हो या किसी कन्या के विवाह में बार-बार रुकावटें आ रही हो और बिना किसी कारण के ही देरी हो रही हो और यदि उसकी इच्छा है किसी के साथ जिसको वह पसंद करती हो उसके साथ विवाह करने के लिए तो गोरी चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए इससे समस्त समस्याएं दूर होती है और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है जिससे मन चाहा वर प्राप्त करने और विवाह के बाद शांति के साथ अपने पति के साथ जीवन व्यतीत करने का आशीर्वाद प्राप्त होता है
मंगला गौरी व्रत के नियम
आरंभ करने से पहले विवाह करने वाली महिलाओं को सबसे पहले देवी पार्वती और उनका आशीर्वाद और पति की लंबी आयु के साथ विवाह जीवन सुखमय हो इसके लिए संकल्प करना चाहिए,
१- इसके लिए सर्वप्रथम प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर के स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए २-घर के मंदिर को भली-भांति साफ करें और मां मंगला गौरी की प्रतिमा अथवा चित्र की स्थापना करें
३- देवी पार्वती को लाल रंग के वस्त्र और 16 श्रृंगार की सामग्री अवश्य अर्पित करें 16 की संख्या में फल, फूल, पान, ,लौंग, इलाइची आदि समर्पित करें
४- घी का दीपक प्रज्वलित करें और मंगला गौरी व्रत की कथा पढ़े और सुन साथ ही साथ चालीसा का पाठ करें और आरती अवश्य करें
५-पार्वती चालीसा के साथ-साथ शिव चालीसा का भी पाठ करना चाहिए और अंततः प्रसाद ग्रहण करके ही पूजा संपन्न करनी चाहिए
६-व्रत के दौरान सात्विक भोजन करना चाहिए और सादे नमक के सेवन से बचना चाहिए जितना हो सके जरूरतमंदों की सहायता करें और उन्हें दान इत्यादि अवश्य करें
व्रत का उद्यापन
व्रत का उद्यापन करने के लिए अंतिम मंगलवार को उसका उद्यापन करें उद्यापन में 16 सुहागिन स्त्रियों को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद अवश्य लें इसके साथ अन्य नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए जैसे व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें किसी की निंदा झूठ बोलना क्रोध करना गलत कार्यों से बचना चाहिए मन और तन दोनों की ही पवित्रता को बनाए रखना , साथ-साथ मन में सकारात्मक विचारों को ही रखना चाहिए
.
मंगला गौरी व्रत में क्या खाना चाहिए ?
मंगला गौरी के व्रत में फलाहार किया जाता है जिसमें फल ,साबूदाना, दूध, दही सम्मिलित है इस व्रत में नमक और अनाज का सेवन नहीं किया जाता है साथ ही साथ लहसुन और प्याज से भी परहेज करना चाहिए
Mangala Gauri ki aarti
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता ब्रह्मा सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।।
अरिकुल पद्म विनासनि जय सेवक त्राता जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुन गाता।
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है, साथा देव वधु जहं गावत नृत्य करता था।
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सटी कहलाता हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।।
शुंभ निशुंभ विदारे हेमंचल स्याता सहस भुज तनु धारिके चक्र लियो हता।
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।।
सृष्टी रूप तुही जननी शिव संग रंगराता नंदी भृंगी बीन लाही सारा मद माता।
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।।
देवन अरज करत हम चित को लाता गावत दे दे ताली मन में रंगराता।
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।।
मंगला गौरी माता की आरती जो कोई गाता सदा सुख संपति पाता।
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।।
BHARAV AARTI
Add Your Heading Text Here भैरव बाबा की आरती का महत्व लाभ और नियम १- भैरव बाबा जिनको काल भैरव भी कहा जाता है।
SURYA AARTI
SURYA DEV KI AARTI सूर्य देव की आरती महत्व लाभ और उनके नियम सूर्य देव का महत्व १- सूर्य देव को संपूर्ण ब्रह्मांड

Paush Amavasya in 2025 falls on Friday, December 19. date, timing, significance, rituals, remedies, and spiritual benefitSamavasya ki kahani,
Paush Amavasya in 2025 falls on Friday, December 19. date, timing, significance, rituals, remedies, and spiritual benefitS दिनांक एवं तिथि तारीख: शुक्रवार, दिसंबर 19, 205
SATYANARAYAN AARTI
SATYANARAYAN AARTI सत्यनारायण भगवान का परिचय और महत्व (Importance of Satyanarayan Puja) सत्यनारायण भगवान** विष्णु जी का एक अवतार हैं।जो कि अपने आप
motivational story
अधूरी मंज़िल से मिली जीत”motivational story कहानी – “अधूरी मंज़िल से मिली जीत” हर सुबह जब सूरज उदित होता है, वह यह संदेश देता है
MAHAKAL AARTI
MAHAKAL AARTI *महाकाल का अर्थ और महत्व (Importance of Mahakal)** “महाकाल” भगवान शिव का वह स्वरूप है जो (समय) के भी स्वामी हैं —
DUTTATREYA AARTI
DUTTATREYA AARTI दत्तात्रेय जी की आरती का महत्व (Importance of Dattatreya Aarti भगवान दत्तात्रेय त्रिमूर्ति — ब्रह्मा, विष्णु और महेश — तीनों के
VITTHAL AARTI
VITTHAL AARTI विठ्ठल जी की आरती – महत्व, लाभ, नियम और पूरा पाठ विठ्ठल जी की आरती का महत्व (Mahatva)** विठ्ठल जी, जिन्हें

TULSI AARTI
TULSI AARTI तुलसी माता की आरती, महत्व, लाभ और नियम *तुलसी का महत्व (Mahatva) तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि **धार्मिक और औषधीय महत्व वाली
NAVGRAH AARTI
NAVGRAH AARTI **नवग्रह आरती का महत्व, लाभ और नियम नवग्रह आरती का महत्व (Mahatva नवग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और
GAYATRI AARTI
GAYATRI AARTI गायत्री माता की आरती का महत्व, लाभ और नियम गायत्री माता का महत्व (Mahatva) **गायत्री देवी** मां को वेदों की जननी, ज्ञान और
KATYAYNI AARTI
KATYAYNI MA KI AARTI *कात्यायनी माता की आरती का महत्व, लाभ और नियम कात्यायनी माता का महत्व (Mahatva)** मां **कात्यायनी** नवदुर्गा का छठा स्वरूप हैं।
SHETALA AARTI
SHETALA MATA KI AARTI शीतला माता की आरती का महत्व, लाभ और नियम शीतला माता की आरती का महत्व (Mahatva) शीतला माता रोगों
ANNAPURNA AARTI
ANNAPURNA MATA KI AARTI अन्नपूर्णा माता की आरती का महत्व, लाभ और नियम अन्नपूर्णा माता की आरती का महत्व (Mahatva) अन्नपूर्णा माता देवी माँ पार्वती
GANGA AARTI
Add Your Heading Text Here गंगा माता की आरती का महत्व, लाभ और नियम गंगा माता की आरती का महत्व (Mahatva) गंगा माता
CHANDRA AARTI
CHANDRA DEV KI AARTI **🌕 चंद्र देव की आरती – महत्व, लाभ और नियम 🌕** 🌙 **चंद्र देव का महत्व चंद्र देव को **मन, शांति,

Margashirsha Amavasya 2025 date, spiritual significance, rituals, mythological story (katha), powerful remedies, and spiritual benefits
Margashirsha Amavasya 2025 date, spiritual significance, rituals, mythological story (katha), powerful remedies, and spiritual benefits दिनांक एवं समय तारीख: बुधवार, 17 दिसंबर 2025 अमावस्या तिथि
SHANI DEV KI AARTI
SHANI DEV KI AARTI शनि देव हिंदू धर्म में न्याय के देवता माने गए हैं। वह नवग्रह में एक ऐसे ग्रह हैं और भगवान सूर्य
SANTOSHI MATA KI AARTI
SANTOSHI MATA KI AARTI संतोषी माता की आरती का महत्व लाभ और नियम महत्व 1- संतोषी माता की आरती करने से व्यक्ति के जीवन
MA SARSWATI KI AARTI
MA SARSWATI KI AARTI सरस्वती की आरती का महत्व / लाभ और नियम महत्व १-मां सरस्वती की आरती करने से विद्या धन, ज्ञान
LAXMI AARTI
MA LAXMI JI KI AARTI माँ लक्ष्मी की आरती का महत्व लाभ और नियम महत्व- १- माँ लक्ष्मी की आरती करने से जीवन
DURGA AARTI
AdMA DURGA KI AARTI मां दुर्गा की आरती का महत्व लाभ और नियम मां दुर्गा की आरती का महत्व इस प्रकार है १-
VISHNU AARTI
SHRI VISHNU JI KI AARTI भगवान विष्णु की आरती का महत्व लाभ और नियम महत्व १- भगवान विष्णु की आरती करने से जीवन
KRISHNA AARTI
SHRI KRISNA JI KI AARTI भगवान श्री कृष्ण की आरती का महत्व लाभ और नियम महत्व १- भगवान श्री कृष्ण की आरती करने

margshirsh ka mahina
Margshirsh Ka Mahina मार्गशीर्ष का महीना 6 नवंबर से शुरू हुआ है। इसे अत्यधिक पवित्र और फलदायक माना जाता है इस पूरे महीने में भगवान
RAM AARTI
SHRI RAM JI KI AARTI भगवान श्री राम जी की आरती का महत्व, लाभ और नियम (Importance, Benefits & Rules of Shri Ram Ji Aarti)**
SHIV AARTI
SHRI SHIV JI KI AARTI शिवजी की आरती करने का महत्व ,लाभ और नियम इस प्रकार हैं १- शिव जी की आरती करने से मन
HANUMAN AARTI
SHRI HANUMAN JI KI AARTI हनुमान आरती का महत्व लाभ और नियम १- हनुमान जी की आरती करने से समस्त भयों का नाश होता है
Ganesh aarti
SHRI GANESH JI KI AARTI गणेश आरती का महत्व इस प्रकार है कि गणेश भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए उनकी आरती करना सर्वोत्तम
VITTHAL CHALISA
VITTHAL CHALISA विट्ठल चालीसा का पाठ करने से हृदय पर इसका लाभकारी प्रभाव होता है जिसके फलस्वरुप हृदय की गति हो हृदय की पंपिंग करिया
