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, Niyam, Upay, Katha in Hindi)
जन्माष्टमी पूजा विधि (पूजा विधि)
, Niyam, Upay, Katha in Hindi)श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में बहुत खुशी और हर्ष के साथ मनाई जाती है। यह पर्व भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि, अर्धरात्रि के समय मनाया जाता है, क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रात्रि 12 बजे हुआ था।
पूजन सामग्री की लिस्ट इस प्रकार है
- श्रीकृष्ण की मूर्ति और झूला
- पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर)
- तुलसी पत्ता, फूल, वस्त्र, माखन-मिश्री, धूप-दीप
- झांझ, मंजीरा, घंटी, मोरपंख
- कलावा, चावल, रोली, पंचमेवा
- झूला सजाने हेतु रेशमी वस्त्र, फूल, बंदनवार
🪔 पूजन प्रक्रिया इस प्रकार है
स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थल को साफ कर श्रीकृष्ण की मूर्ति या बाल गोपाल को झूले में स्थापित करें।
- पहले जल से मूर्ति को स्नान कराएं, फिर पंचामृत से स्नान कराएं।
- सुंदर नए वस्त्र, आभूषण, मुकुट, बांसुरी और मोरपंख से लड्डू गोपाल को सजाएं
- तुलसी पत्र,माखन-मिश्री, और फल भोग मेंअर्पित करें।
- धूप, दीप, अगरबत्ती जलाकर श्रीकृष्ण की आरती करें। और जीत गए
- रात्रि 12 बजे जन्म समय पर शंख, घंटी, ढोल-नगाड़े आदि बजाकर भगवान का जन्म उत्सव मनाएं।
- सभी को प्रसाद वितरित करें।
व्रत के नियम (Janmashtami Vrat Niyam)
- जन्माष्टमी व्रत में पूरे दिन निर्जल या फलाहारी व्रत रखा जाता है। इस दिन व्यक्ति अपनी समर्थ के अनुसार अगर निर्जल व्रत रख सकता है तो ठीक है अन्यथा फल खाकर भी व्रत पूरा किया जा सकता है
- प्याज, लहसुन, अनाज ,तामसिक भोजन आदि का सेवन वर्जित है।
- मन, वचन, कर्म से शुद्ध रहें – क्रोध, झूठ, क्लेश से बचें। किसी की न बुराई सुन ना किसी की बुराई करें
- दिन भर “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” चलो भी “श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारे” का जप करें।मन ही मन में भगवान का नाम जाप करते रहे
- रात्रि में जागरण करें और भजन-कीर्तन करें। इसे शुभ फलों की प्राप्ति होती है
जन्माष्टमी कथा (Janmashtami Katha)
द्वापर युग में जब पृथ्वी पाप से अधिक त्रस्त हो चुकी थी, तब भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में अवतार लिया। कोष्टक, जो अत्याचारी राजा था, उसकी बहन देवकी और उसके पति वासुदेव के आठवें पुत्र के हाथों उसका वध निश्चित था।
कंस ने देवकी-वसुदेव को कारागार में डाल दिया और उनके 6 पुत्रों की हत्या कर दी। सातवें गर्भ से बलराम और आठवें से श्रीकृष्ण भगवन का जन्म हुआ। श्रीकृष्ण के जन्म के समय अद्भुत चमत्कार हुए — सभी प्रहरी सो गए, बेड़ियाँ टूट गईं और वासुदेव उन्हें लेकर यमुना पार कर गोकुल में नंद बाबा के घर ले गए।और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया
श्रीकृष्ण ने बाल्यकाल में पूतना, शकटासुर, कंस जैसे राक्षसों का वध किया और धर्म की स्थापना करके मानवता की रक्षा की।
🪄 जन्माष्टमी विशेष उपाय (Upay / Remedies)
💰 धन-संपत्ति के लिए:
- श्रीकृष्ण को सफेद माखन में तुलसी डालकर भोग लगाएं।
- “ओम श्रीं नमः श्रीकृष्णाय” मंत्र का एक माला का जाप करें
🧒 संतान सुख के लिए:
- बाल गोपाल को झूले में झुलाएं और “नंदलाल” के नाम से स्तुति करें। और संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें
- 108 बार “ओम देवकीसुत गोविंदा वासुदेव जगत्पते” मंत्र पढ़ें।
🧘♀️ मन की शांति और प्रेम वृद्धि के लिए:
- राधा-कृष्ण की जोड़े में पूजा करें।
- गुलाब के फूल और मिश्री से भोग लगाएं। और आशीर्वाद प्राप्त करें
🧿 कर्ज मुक्ति हेतु:
- श्रीकृष्ण को 11 तुलसी पत्र चढ़ाएं और 1 नारियल पर अपने ऋण की भावना रखकर बहते जल में प्रवाहित करें।
जन्माष्टमी पूजन के लाभ (Benefits):
- व्यक्ति के जीवन में प्रेम, सुख और भक्ति की वृद्धि होती है।
- समस्त पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- शत्रु बाधा, कोर्ट केस जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। और व्यक्ति के जीवन में शांति स्थापित होती है
- घर में सद्भाव, संतान सुख और धन वैभव आता है।
- भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से जीवन में हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।
✨ श्रीकृष्ण मंत्र जाप (Mantra for Chanting):
- “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” (108 बार)
- “ॐ श्री कृष्णाय नमः”
- “हे कृष्ण, वासुदेव, हरि, परमात्मा।
हे दुःखों के नाश करने वाले गोविन्द, मैं आपको प्रणाम करता हूँ।
🎁 विशेष सुझाव:
- इस दिन झूला सजाने की परंपरा का पालन अवश्य करें। यह संतान सुख और सौभाग्यवर्धक माना गया है।
- घर के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में बाल गोपाल का मंदिर बनाना शुभ माना जाता हैहै।
🌼 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की कथा
द्वापर युग में जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ गया था, तब पृथ्वी माता गाय के रूप में ब्रह्मा जी के पास पहुँचीं और अपनी पीड़ा सुनाई। ब्रह्मा जी, सभी देवताओं के साथ भगवान विष्णु के पास क्षीरसागर पहुँचे। भगवान विष्णु ने उन्हें विश्वास दिया कि वे स्वयं धरती पर अवतार लेकर अधर्म का नाश करेंगे।और जनहित की रक्षा करेंगे
मथुरा नगरी में उस समय कोष्टक नामक एक अत्याचारी राजा राज्य कर रहा था। वह अपनी बहन देवकी से अत्यधिक प्रेम करता था। जब देवकी का विवाह यदुवंशी राजा वासुदेव से हुआ, और जैसे ही कंस उन्हें विदा करने लगा, तभी आकाशवाणी हुई:
“हे कंस! जिस बहन को तू इतने प्रेम से विदा कर रहा है, उसी का आठवाँ पुत्र तेरा मृत्यु का कारण बनेगा
यह सुनकर कंस क्रोधित हो उठा और देवकी को मारने लगा। वासुदेव जी ने समझाया कि वह उन्हें मारें नहीं, बल्कि वे हर संतान को कंस के हवाले कर देंगे। कंस ने दोनों को बंदीगृह (कारागार) में डाल दिया।
कंस ने उनके एक-एक करके छह पुत्रों को जन्म लेते ही मार डाला। सातवें गर्भ से शेषनाग ने बलराम के रूप में अवतार लिया। आठवें गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया।
भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, मध्यरात्रि के समय देवकी ने भगवान विष्णु को चार भुजाओं वाले रूप में जन्म दिया। उन्होंने माता-पिता को दर्शन देकर कहा:
“मैं अब बालक रूप लेकर वासुदेव के हाथों गोकुल जाऊँगा और कंस का नाश करूंगा।”
फिर भगवान ने अपनी माया से कारागार के सब ताले खोल दिए, पहरेदार सो गए, और यमुना नदी मैं भी रास्ता दे दिया । वासुदेव जी ने श्रीकृष्ण को लेकर यमुना पार की और गोकुल में नंद बाबा के घर में जन्मी कन्या योगमाया को वहाँ से ले आए।
प्रभु श्रीकृष्ण का नंद-यशोदा के घर पालन पोषण हुआ। बाल्यकाल में उन्होंने पुत्री पूतना,शकटासुर,त्रिनावर्त, आदि असुरों का वध किया, गोवर्धन पर्वत उठाया, कालिय नाग का दमन किया और अंततः कंस का वध कर मथुरा को मुक्ति दिलाई।
🕊️ कथा का संदेश
- जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, भगवान अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। और मानवता की रक्षा करते हैं
- श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, करुणा, पराक्रम और नीति का प्रतीक है।
- जन्माष्टमी की रात भक्ति, भजन और ध्यान से प्रभु श्रीकृष्ण को प्रसन्न किया जाता है।
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