SHANI JAYANTI

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SHANI शनि जयंती कथा / SHANI JAYANTI /शनि जयंती का महत्व / शनि जयंती की तारीख एवं पूजा करने की विशेष विधि 

SHANI JAYANTI /शनि देव न्याय प्रिय देवता है, हिंदू धर्म और ज्योतिष में सूर्य देव के पुत्र भगवान SHANI शनि देव को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है जो कि कर्म फल दाता है और मनुष्य को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं 

 SHANI JAYANTI शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी है इनकी चाल अत्यधिक धीमी है, SHANI JAYANTI  शनि देव ढाई साल बाद अपनी राशि बदलते हैं 

न्याय के देवता SHANI JAYANTI शनि देव उन लोगों को सफलता प्रदान करते हैं जिन्होंने कड़ी मेहनत अनुशासन और ईमानदारी के द्वारा अपने जीवन में तपस्या और संघर्ष किया है ऐसी मान्यता है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन काल में एक बार शनि देव की साढ़े साती से गुजरना ही पड़ता है और इसी अवस्था में SHANI JAYANTI शनि देव उसे मनुष्य को उसके कर्मों के शुभ और अशुभ फल प्रदान करते हैं 

 SHANI JAYANTI शनि जयंती इस वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या 6 जून 2024 को है, इस दिन शनि महाराज की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा विधि और इसके महत्व का ज्ञान होनाअत्यधिक लाभकारी सिद्ध होता है

शनि जयंती कब है

इस वर्ष 2024 में SHANI JAYANTI शनि जयंती 6 जून गुरुवार के दिन मनाई जा रही है इस दिन अमावस्या तिथि है अमावस्या तिथि 5 जून की शाम को 7:54 से आरंभ होगी और 6 जून को शाम 6:07 तक इसका समापन होगा,और इस प्रकार से  SHANI JAYANTI शनि जयंती 6 जून को ही मनाई जा रही है

SHANI JAYANTI शनि जयंती पर शनि देव की पूजा करने की विधि

१-SHANI JAYANTI शनि जयंती पर

 व्रती को प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए

२- चौकी पर काले रंग के वस्त्र को बिछाकर उस पर शनि देव की प्रतिमा और चित्र की स्थापना स्वच्छता के साथ करनी चाहिए

३-शनि देव के सामने

सरसो तेल का दीपक जलाकर उनको धूप इत्यादि दिखाना चाहिए

४- SHANI JAYANTI शनि देव की प्रतिमा को पंचगव्य, पंचामृत आदि से स्नान करना चाहिए और इसके बाद कुमकुम,काजल,फूल करके शनि देव कोअर्पित करना चाहिए

५-भगवान शनि को तेल से बनी हुई मिठाइयों का भोग प्रसाद के रूप में लगाना चाहिए

६-पंचौपचार और पूजा के संपन्न होने के पश्चात शनि मंत्रो का माला का जाप अवश्य करना चाहिए और शनि चालीसा का पाठ करके भी शनि देव की विशेष अनुकंपा प्राप्त करनी चाहिए

७-इसके पश्चात शनि देव की आरती करेंऔर उनसे दिल से अपने लिए प्रार्थना करें

८- SHANI JAYANTI शनि जयंती के दिन चीटियों को काला तिल और गुड़ अवश्य खिलाएं

९- SHANI JAYANTI शनि जयंती के दिन जूते, चप्पलों गरीबों में अवश्य दान करें 

१०-ज्येष्ठ मास में होने वाली SHANI JAYANTI शनि जयंती अथवा इस पूरे महीने में काले कुत्ते ,कौवे को खाना खिलाने से शनि देव अत्यधिक प्रसन्न होते हैं

SHANI JAYANTI शनि जयंती का महत्व

जो भी व्यक्ति शनि की साढ़े साती या शनि की ढैया से अत्यधिक परेशान है उन्हें शनि जयंती के दिन शनि देव की पूजा नियम पालन के साथ अवश्य करनी चाहिए, शनि जयंती 6 जून को है सूर्य ढलने के पश्चात शनि देव की पूजा करने से विशेष कृपाऔर आशीर्वाद की प्राप्ति होती है

SHANI JAYANTI शनि जयंती की पूजा के नियम

SHANI JAYANTI शनि जयंती के दिन शनि देव को प्रसन्न करने के लिए प्रातः काल स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए और शनि मंदिर जाकर सरसों के तेल में काले तिल डालकर के शनिदेव को अर्पित करना चाहिए,इसी के साथ-साथ शनि देव की चालीसा का पाठ करना भी अत्यधिक उत्तम रहता है 

१-शनि देव न्याय प्रिय देवता है इसीलिए कभी भी किसी के बुरे कर्मों में या गलत कार्यों में किसी का साथ नहीं देना चाहिए अन्यथा  शनिदेव रुष्ट हो जाते हैं

२-शनि देव को नीले रंग के अपराजिता के फूल पूजा के दिन अर्पित करना चाहिए

३- SHANI JAYANTI शनि जयंती के दिन प्रात:काल शिव भगवान की पूजा अर्चना करने से अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है इस दिन शिव भगवान को जल में काले तिल मिला करअभिषेक करना चाहिए

४- SHANI JAYANTI शनि जयंती के दिन गरीबों अथवा श्रमिक वर्ग के लोगों कोअपनी क्षमता के अनुसार कुछ ना कुछ दान या सहायता अवश्य करनी चाहिए और उनके साथ व्यवहार भी अच्छा बनाए रखना चाहिए,यदि इस कार्य को नियमित रूप से किया जाए तो शनि देव की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है

५-यदि कोई व्यक्ति शनि दोष से पीड़ित है तो इस दिन वह हनुमान चालीसा का पाठ भी करके उनकी कृपा प्राप्त कर सकता है

६- SHANI JAYANTI शनि जयंती के दिन शनि देव को भोग में तिल, गुड़, खिचड़ी, काले तिल से बनी हुई चीज और गुलाब जामुन का भोग लगाना चाहिए,भोग सात्विक  और शुद्धता से परिपूर्ण होना चाहिए

७-  SHANI JAYANTI शनि जयंती के दिन अगर आप व्रत धारण करते हैं तो इस दिन फलाहार खाना चाहिए और व्रत में अन्न  नहीं खाना चाहिए शाम के समय उड़द  की दाल की खिचड़ी खाकर ही व्रत खोलना चाहिए,व्रत के अगले दिन ही सुबह नहा कर पूजा पाठ करने के पश्चात ही खाना चाहिए अन्यथा व्रत पूर्ण माना नहीं जाता है

                           SHANI JAYANTI      शनि जयंती व्रत कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा दक्ष की पुत्री संज्ञा का विवाह सूर्य देव के साथ हुआ था सूर्य देव के तीन संताने मनु, यमराज और यमुना थे संज्ञा, सूर्य देव के तेज से परेशान रहती थी दिन बीतते  गए ,किंतुसूर्य देव का तेज संज्ञा ज्यादा दिनों तक सहन नहीं कर पा रही थी तभी उसे एक उपाय सूझा और उन्होंनेअपने बच्चों का पालन करने के लिए अपनी तपस्या से अपनी छाया को सूर्य देव के पास छोड़कर चली गई

संज्ञा का प्रतिरूप होने के कारण इनको छाया के नाम से भी जाना जाता है किंतु संज्ञा ने छाया को सूर्य देव के बच्चों के जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि यह राज उन दोनों के बीच में ही रहना चाहिए,संज्ञा वन में जाकर घोड़ी का रूप धारण करके तपस्या में लीन हो ,सूर्य देव को तनिक भी आभास ना हुआ कि उनके साथ रहने वाली उनकी पत्नी संज्ञा नहीं  है

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छाया रूप होने के कारण सूर्य देव के तेज से उन्हें कोई भी परेशानी नहीं हो रही थी इसके पश्चात उन्हें मनु, शनि देव और भद्रा तीन संताने प्राप्त हुई जब शनिदेव छाया के गर्भ में थे तब छाया ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी तपस्या के दौरान भूख प्यास धूप, गर्मी देने का प्रभाव छाया के गर्भ में पल रही संतान पर भी पड़ा जिसकी वजह से शनि देव का रंग काला हो गया, जन्म के पश्चात शनि देव के रंग को देखकर सूर्य देव ने पत्नी छाया पर संदेह करते हुए उन्हें अत्यधिक अपमानित किया

मां के तप की शक्ति शनि देव को गर्भ में प्राप्त हो गई थी उन्होंने क्रोधित होकर अपने पिता सूर्य देव को देखा तो उनकी शक्ति से उनका रंग काला हो गया और उनको कुष्ठ रोग हो गया, घबराकर सूर्य देव भगवान शिव के शरण में पहुंचे शिव ने सूर्य देव को उनकी गलती का आभास कराया, सूर्यदेव ने पश्चाताप में क्षमा मांगी,भगवान शिव ने फिर से उन्हें अपनी असली रूप में उन्हें जाने का आशीर्वाद दिया इसी के कारण पिता और पुत्र का संबंध सदैव के लिए खराब हो गया

इस प्रकार से आज के दिन शनि देव की पूजा मंत्र करने से ही अनेक समस्याओं  का समाधान हो जाता है इसीलिए सदैवअच्छे कर्मों को करते हुए शनि देव की कृपा प्राप्त करते रहना चाहिए

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