Durga Saptashi Daswa  Adhyaya 9

NAVRATRI 2024 Durga Saptashati Paath

(निशुम्भ वध)

Durga Saptashati NAVRATRI 2024
 राजा ने ऋषि मेधा से कहा- हे ऋषिराज ! आपने रक्तबीज के वध से सम्बन्ध रखने वाला वृतांत मुझे सुनाया। अब मैं रक्तबीज के मरने के पश्चात क्रोध में भरे हुए शुम्भ व निशुम्भ ने जो कर्म किया, वह सुनना चाहता हूँ।

NAVRATRI 2024  महर्षि मेघा ने कहा- रक्तबीज के मारे जाने पर शुम्भ और निशुम्भ को बड़ा क्रोध आया और अपनी बहुत बड़ी सेना का इस प्रकार सर्वनाश होते देखकर निशुम्भ देवी पर आक्रमण करने के लिए दौड़ा, उसके साथ बहुत से बड़े-बड़े असुर देवी को मारने के वास्ते दौड़े और महा पराक्रमी शुम्भ अपनी सेना सहित चण्डिका को मारने के लिए बढ़ा।

NAVRATRI 2024 फिर शुम्भ और निशुम्भ का देवी से घोर युद्ध होने लगा और वह दोनों असुर इस प्रकार देवी पर बाण फेंकने लगे जैसे मेघों से वर्षा हो रही हो, उन दोनों के चलाये हुए बाणों को देवी ने अपने बाणों से काट डाला और अपने शस्त्रों की वर्षा से उन दोनों दैत्यों को चोट पहुंचाई, निशुम्भ ने तीक्ष्ण तलवार और चमकती हुई ढाल लेकर देवी पर आक्रमण किया तब देवी ने अपने क्षुरप्र नामक बाण से निशुम्भ की तलवार व ढाल दोनों को ही काट डाला।

NAVRATRI 2024
तलवार और ढाल कट जाने पर निशुम्भ ने देवी पर शक्ति से प्रहार किया। देवी ने अपने चक्र से उसके दो टुकड़े कर दिए। फिर क्या था दैत्य मारे क्रोध के जल–भुन गया और उसने देवी को मारने के लिए उसकी ओर शूल फेंका, किन्तु देवी ने अपने मुक्के से उसको चूर–चूर कर डाला, फिर उसने देवी पर गदा से प्रहार किया, देवी ने त्रिशूल से गदा को भस्म कर डाला, इसके पश्चात वह फरसा हाथ में लेकर देवी की ओर लपका।

NAVRATRI 2024 देवी ने अपने तीखे बाणों से उसे धरती पर सुला दिया। अपने पराक्रमी भाई निशुम्भ के इस प्रकार से मरने पर शुम्भ क्रोध में भरकर मारने के लिए दौड़ा। वह रथ में बैठा हुआ उत्तम आयुधों से सुशोभित अपनी आठ बड़ी-बड़ी भुजाओं से सारे आकाश को ढके हुए था। NAVRATRI 2024

NAVRATRI 2024 शुम्भ को आते हुए देखकर देवी ने अपना शंख बजाया और धनुष की टंकोर का भी अत्यंत दुस्सह शब्द किया, साथ ही अपने घण्टे के शब्द से जो कि सम्पूर्ण दैत्य सेना के तेज को नष्ट करने वाला था सम्पूर्ण दिशाओं को व्याप्त कर दिया।

NAVRATRI 2024 
इसके पश्चात देवी के सिंह ने भी अपनी दहाड़ से जिसे सुन बड़े-२ बलवानों को मद चूर-चूर हो जाता था, आकाश पृथ्वी और दशों दिशाओं को पूरित कर दिया, फिर आकाश में उछलकर काली ने अपने दांतों तथा हाथों को पृथ्वी पर पटका, उसके ऐसा करने से ऐसा शब्द हुआ, जिससे कि उससे पहले के सरे शब्द शांत हो गए। NAVRATRI 2024

इसके पश्चात शिवदूती ने असुरों के लिए भय उत्पन्न करने वाला अट्टहास किया, जिसे सुनकर सब दैत्य थर्रा उठे और शुम्भ को बड़ा क्रोध हुआ, फिर अम्बिका ने उसे अरे दुष्ट ! खड़ा रह!!, खड़ा रह!! कहा तो आकाश से सभी देवता ‘जय हो, जय हो, बोल उठे ! शुम्भ ने वहाँ आकर ज्वालाओं से युक्त एक अत्यंत भयंकर शक्ति छोड़ी, जिसे आते देखकर देवी ने अपनी महोल्का नामक शक्ति से काट डाला।

 NAVRATRI 2024 हे राजन! फिर शुम्भ के सिंह नाद से तीनों लोक व्याप्त हो गए और उसकी प्रतिध्वनि से ऐसा घोर शब्द हुआ, जिसने इससे पहले के सब शब्दों को जीत लिया। शुम्भ के छोड़े बाणों को देवी ने और देवी के छोड़े बाणों को शुम्भ ने अपने बाणों से काटकर सैकड़ों और हजारों टुकड़ों में परिवतिर्त कर दिया। NAVRATRI 2024

NAVRATRI 2024 इसके पश्चात जब चण्डिका ने क्रोध में भर शुम्भ को त्रिशूल से मारा तो वह मूर्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा, जब उसकी मूर्छा दूर हुई तो वह धनुष लेकर आया और अपने बाणों से उसने देवी काली तथा सिंह को घायल कर दिया, फिर उस राक्षस ने दस हजार भुजाएं धारण करके चक्रादि आयुधों से देवी को आच्छादित कर दिया,

NAVRATRI 2024 तब भगवती ने कुपित होकर अपने बाणों से उन चक्रों तथा बाणों को काट डाला, यह देख कर निशुम्भ हाथ में गदा लेकर चण्डिका को मारने के लिए दौड़ा, उसके आते ही देवी ने तीक्ष्ण धार वाले खड्ग से उसकी गदा को काट डाला।

NAVRATRI 2024 उसने फिर त्रिशूल हाथ में लिया, देवताओं को दुखी करने वाले निशुम्भ को त्रिशूल हाथ में लिए हुए आता देखकर चण्डिका ने अपने शूल से उसकी छाती पर प्रहार किया और उसकी छाती को चीर डाला। शूल विदीर्ण हो जाने पर उसकी छाती में से एक उस जैसा ही महापराक्रमी दैत्य ठहर जा ! ठहर जा ! कहता हुआ निकाला ।

 NAVRATRI 2024 उसको देखकर देवी ने बड़े जोर से ठहाका लगाया। अभी वह निकलने भी ने पाया था कि उसका सिर अपनी तलवार से काट डाला। सिर के कटने के साथ ही वह पृथ्वी पर गिर पड़ा। तदन्तर सिंह दहाड़–दहाड़ कर असुरों का भक्षण करने लगा और काली व शिवदूती भी राक्षसों का रक्त पीने लगी। NAVRATRI 2024

NAVRATRI 2024 कौमारी की शक्ति से कितने ही महादैत्य नष्ट हो गए। ब्रह्माणी के कमण्डल के जल से कितने ही असुर समाप्त हो गए। कई दैत्य माहेश्वरी के त्रिशूल से विदीर्ण होकर पृथ्वी पर गिर पड़े और कई बाराही के प्रहारों से छिन्न – भिन्न होकर धराशायी हो गए।

NAVRATRI 2024 वैष्णवी ने भी अपने चक्र से बड़े २ महा पराक्रमियों का कचूमर निकालकर उन्हें यमलोक भेज दिया और ऐन्द्री से कितने ही महाबली राक्षस टुकड़े २ हो गए । कई दैत्य मारे गए , कई भाग गए, कितने ही काली शिवदूती और सिंह ने भक्षण कर लिए।

NAVRATRI 2024

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