KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 5

 

 KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5 राजा पृथु बोले-हे मुनि जी ! आपने कार्तिक और माघ मास का विस्तृत फल के बारे में कहा । अब इसके विधिवत स्नान की विधि, नियम और (उद्यापन की विधि भी) आप हमसे कहे 

KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5 नारद जी ने कहा कि आप विष्णु भगवान के अंश से उत्पन्न हुए हैं,अतएव यह बात आपको ज्ञात ही है, तथापि मैं यथोचित विधान आपसे कहता हूं, उसे एकाग्र मन से सुनिए। आश्विन मास की शुक्ल पक्ष एकादशी से शुद्ध होकर KARTIK MAAS का व्रत करना आरंभ करना चाहिए। इस व्रत को करने वाला सर्वदा रात्रि के चौथे प्रहर में उठे। जल का पात्र लिए हुए गांव से बाहर पूर्व अथवा उत्तर दिशा में जाये ।

KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5 उसके बाद जो मनुष्य मुख शुद्धि नहीं करता, उसे किसी भी मंत्र का उचित फल प्राप्त नहीं होता है। अत: दांत और जीभ को पूर्ण रूप से शुद्ध करना चाहिए और निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करते हुए दातुन तोड़नी चाहिए।

KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5 हे वनस्पतये! आप मुझे आयु, कीर्ति, तेज, प्रज्ञा, पशु, सम्पत्ति, महाज्ञान, बुद्धि और विद्या प्रदान करो।

KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5 इस प्रकार उच्चारण करके वृक्ष के दांतुन ले, दूध वाले वृक्षों से दांतुन नहीं लेनी चाहिए। इसी प्रकार कपास, कांटेदार वृक्ष तथा जले हुए वृक्ष से भी दांतुन लेना मना है। जिससे उत्तम गन्ध आती हो और जिसकी टहनी कोमल हो, ऎसे ही वृक्ष से ही दातुन  करना चाहिए।

KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5प्रतिपदा, अमावस्या, नवमी, छठी, रविवार को, चन्द्र तथा सूर्यग्रहण में दांतुन नहीं करनी चाहिए। तत्पश्चात भली-भाँति स्नान कर के फूलमाला, चन्दन और पान आदि पूजा की सामग्री लेकर प्रसन्न मन व भक्तिपूर्वक शिवालय में जाकर सभी देवी-देवताओं की हे सुरेश्वर, हे देव! न मैं मन्त्र जानता हूँ, न क्रिया, मैं भक्ति से भी हीन हूँ, मैंने जो कुछ भी आपकी पूजा की है उसे आप स्वीकार करें।

KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5 अर्ध्य, आचमनीय आदि वस्तुओं से पृथक-पृथक पूजा करके प्रार्थना एवं प्रणाम करना चाहिए फिर भक्तों के साथ स्वर में स्वर मिलाकर श्रीहरि का भजन-कीर्तन करना चाहिए।

KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5 मन्दिर में जो  भगवान श्रीहरि का कीर्तन करने आते है  उनका माला, चन्दन, ताम्बूल आदि से पूजन करना चाहिए क्योंकि देवालयों में भगवान विष्णु को अपनी तपस्या, योग और दान द्वारा प्रसन्न करते थे परन्तु कलयुग में भगवद गुणगान को ही भगवान श्रीहरि को प्रसन्न करने का एकमात्र साधन माना गया है।

KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5 नारद जी राजा पृथु से बोले: हे राजन! एक बार मैंने भगवान से पूछा कि हे प्रभु! आप सबसे अधिक कहाँ निवास करते हैं?

KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5 इसका उत्तर देते हुए भगवान ने कहा: हे नारद! मैं वैकुण्ठ या योगियों के हृदय में ही निवास नहीं करता अपितु जहाँ मेरे भक्त मेरा कीर्तन करते हैं, मैं वह अवश्य निवास करता हूँ।। जो मनुष्य चन्दन, माला आदि से मेरे भक्तों का पूजन करते हैं उनसे मेरी ऐसी प्रीति होती है जैसी कि मेरे पूजन से भी नहीं हो सकती।

KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5 नारद जी ने फिर कहा: शिरीष, धतूरा, गिरजा, चमेली, केसर, कन्दार और कटहल के फूलों व चावलों से भगवान विष्णु की पूजा नहीं करनी चाहिए। अढ़हल, कन्द, गिरीष, जूही, मालती और केवड़ा के पुष्पों से भगवान शंकर की पूजा नहीं करनी चाहिए। जिन देवताओं की पूजा में जो फूल निर्दिष्ट हैं उन्हीं से उनका पूजन करना चाहिए। पूजन समाप्ति के बाद भगवान से क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए।

KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5 ऐसी प्रार्थना करने के पश्चात  प्रणाम करके भगवद कीर्तन अवश्य करना चाहिए। श्रीहरि की कथा सुननी चाहिए और प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।

KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5 जो मनुष्य उपरोक्त विधि के अनुसार कार्तिक व्रत का अनुष्ठान करते हैं वह जगत के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मुक्ति को प्राप्त करते हैं। KARTIK MAAS KA KATHA ADHYAY 5

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