Table of Contents
ToggleAshadha Amavasya 2025,date, significance, rituals, story (katha), remedies, and benefits.
दिनांक एवं समय
- दिनांक: बुधवार, 25 जून, 2025
- अमावस्या तिथि आरंभ: 24 जून 2025, प्रातः 6:59 बजे
*अमावस्या तिथि समाप्त: 25 जून, 2025, 4:00 बजे
हिंदू कैलेंडर के चौथे महीने में आने वाली आषाढ़ अमावस्या का गहरा आध्यात्मिक महत्व है:
- पैतृक पूजा: यह प्रदर्शन के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है Pitra Tarpan और पिंडदान, अनुष्ठान जो पूर्वजों का सम्मान करते हैं और उन्हें प्रसन्न करते हैं, माना जाता है कि इससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है और जीवित लोगों को आशीर्वाद मिलता है।
- आध्यात्मिक शुद्धि: यह दिन नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने और दैवीय आशीर्वाद प्राप्त करने के उद्देश्य से आध्यात्मिक प्रथाओं के लिए आदर्श माना जाता है।
*दीपा पूजा: दीपक जलाना अंधेरे और अज्ञानता को दूर करने, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने का प्रतीक है।
आषाढ़ अमावस्या कथा (आध्यात्मिक कथा)
एक समय की बात है, एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। वो दोनों ही भगवान विष्णु के बहुत परम भक्त थे। दोनों प्रतिदिन अपना अधिकतर समय भगवान के ध्यान और पूजा-पाठ में व्यतीत करते थे। ब्राह्मण का घर धन-धान्य से भरा हुआ था, किंतु संतान न होने के कारण, वह दोनों अत्यंत दुखी रहते थे। एक दिन ब्राह्मण ने अपनी पत्नी से कहा कि मैं तपस्या करने के लिए वन में जा रहा हूं। इसके बाद वह भगवान पर भरोसा और संतान की कामना लेकर वन में तपस्या करने के लिए चला गया।
ब्राह्मण को कठोर तपस्या करते हुए कई वर्ष बीत गए थे , लेकिन उसे फल की प्राप्ति नहीं हुई। अंत में हार मानकर ब्राह्मण ने अपने जीवन को समाप्त करने का निश्चय कर लिया। अपने जीवन समाप्त करने के बारे में सोचकर, उसने पेड़ की डाली पर फांसी का फंदा डाल दिया और अपने गले पर बांधने लगा।
तभी वहां पर सुख अमावस्या प्रकट होकर बोलीं, हे ब्राह्मण तुम्हारे भाग्य में सात जन्म तक कोई संतान नहीं लिखी है, किंतु मैं तुम्हें दो कन्या का वरदान देती हूं।तुम अपनी एक कन्या का नाम अमावस्या रखना और दूसरी का नाम पूनम रख देना। तुम अपनी स्त्री से कहना कि वह एक वर्ष तक सुख अमावस्या का व्रत रखे और अमावस्या के दिन एक कटोरी चावल भरकर उसपर दक्षिणा रखकर दान कर दे।
सुख अमावस्या की बातें सुनकर ब्राह्मण घर आया और ये पूरा वृतांत उसने अपनी पत्नी को सुनाया। सुख अमावस्या के आदेश अनुसार, ब्राह्मणी ने व्रत रखना आरंभ कर दिया। कुछ दिनों बाद ब्राह्मण के घर दो कन्याओं ने जन्म लिया। जिसमें से एक कन्या का नाम अमावस्या और दूसरी का नाम पूनम रखा गया। जब ब्राह्मण की दोनों बेटियां बड़ी हुई तो, ब्राह्मण ने उनका विवाह कर दिया। बड़ी बहन अमावस्या धार्मिक प्रवृत्ति की थी, वह काफी समय भगवान की पूजा और धर्म-कर्म में व्यतीत करती थी। इसके विपरीत पूनम भगवान को बिल्कुल भी नहीं मानती थी। बड़ी बहन अमावस्या के घर में सुख समृद्धि का भंडार था, पर छोटी बहन के घर में दरिद्रता छाई हुयी थी।
जब बड़ी बहन अमावस्या को अपनी छोटी बहन पूनम के विषय में पता चला कि वो बहुत दुखी है। तब अमावस्या अपनी बहन के लिए ढेर सारा सामान लेकर उससे मिलने गई। छोटी बहन के घर पहुंचकर अमावस्या ने उसे एक वर्ष तक सुख अमावस्या का व्रत करने की सलाह दी। साथ ही अमावस्या ने व्रत को विधि पूर्वक करने के बारे में पूनम को बताते हुए ये भी कहा कि, तुम एक वर्ष तक सुख अमावस्या का व्रत करना और एक कटोरे में चावल भरकर उसे दान कर देना। ऐसा करने से तुम्हारे सभी कष्ट दूर हो जाएंगे और घर में सुख समृद्धि आएगी। पूनम ने अपनी बहन की बात को मानते हुए बिल्कुल ऐसा ही किया। जिसके बाद एक साल के भीतर पूनम का घर धन-धान्य से भर गया और उसके घर एक बेटे ने जन्म लिया। इस प्रकार जो भी विधि पूर्वक सुख अमावस्या का व्रत करता है, उसके घर में सुख समृद्धि आती है।
करने योग्य अनुष्ठान
- पवित्र स्नान:
- दिन की शुरुआत किसी नदी, झील या घर पर गंगाजल डालकर पवित्र स्नान से करें।
- पितृ तर्पण और पिंड दान:
- काले तिल, जौ और कुशा घास मिश्रित जल सूत की ओर मुख करके पितरों को तर्पण करें।
- दीपा पूजा:
- टेबल (चौरंग) को साफ करके रानोली से सजाएं।
- पांच तत्वों (पंच महाभट्ट) के प्रतीक, कई तेल के दीपक रखें और जलाएं।
- देवताओं की पूजा:
- भगवान शिव, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें और उनका आशीर्वाद लें।
- Peepal Tree Worship:
- पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं और प्रार्थना करें, ऐसा माना जाता है कि इससे परेशानियां कम हो जाती हैं।
- दान:
- जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और आवश्यक चीजें दान करें, ऐसा माना जाता है कि यह कार्य समृद्धि और गति लाता है।
Remedies (Upaay)
- पितृ के लिए: पितरों को प्रसन्न करने के लिए तर्पण और पिंडदान करें।
- शनि डोसा के लिए: पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनि मंत्रों का जाप करें।
- वित्तीय मुद्दे के लिए: वंचितों को काले तिल, लोहे के बर्तन और कपड़े दान करें।
आषाढ़ अमावस्या मनाने के लाभ
- पैतृक आशीर्वाद: दिवंगत आत्माओं के लिए शांति और वंशजों के लिए आशीर्वाद सुनिश्चित करता है।
- आध्यात्मिक विकास: आध्यात्मिक प्रथाओं को बढ़ाता है, जिससे आंतरिक शांति और ज्ञान प्राप्त होता है।
- नकारात्मकता को दूर करना: किए गए अनुष्ठान नकारात्मक ऊर्जाओं और बाधाओं को दूर करने में मदद करते हैं।
- समृद्धि और कल्याण: धर्मार्थ कार्य और पूजा समृद्धि और समग्र कल्याण को आमंत्रित करते हैं।

Falgun / Phalgun maas 2026 kab hai ? importance /pooja vidhi / upay / mantra
फाल्गुन मास 2026 हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र और उत्सवों से भरा महीना माना जाता है। यह आध्यात्मिक साधना, प्रेम, दान और नए आरंभ का
BHARAV AARTI
Add Your Heading Text Here भैरव बाबा की आरती का महत्व लाभ और नियम १- भैरव बाबा जिनको काल भैरव भी कहा जाता है।
SURYA AARTI
SURYA DEV KI AARTI सूर्य देव की आरती महत्व लाभ और उनके नियम सूर्य देव का महत्व १- सूर्य देव को संपूर्ण ब्रह्मांड

Paush Amavasya in 2025 falls on Friday, December 19. date, timing, significance, rituals, remedies, and spiritual benefitSamavasya ki kahani,
Paush Amavasya in 2025 falls on Friday, December 19. date, timing, significance, rituals, remedies, and spiritual benefitS दिनांक एवं तिथि तारीख: शुक्रवार, दिसंबर 19, 205
SATYANARAYAN AARTI
SATYANARAYAN AARTI सत्यनारायण भगवान का परिचय और महत्व (Importance of Satyanarayan Puja) सत्यनारायण भगवान** विष्णु जी का एक अवतार हैं।जो कि अपने आप
motivational story
अधूरी मंज़िल से मिली जीत”motivational story कहानी – “अधूरी मंज़िल से मिली जीत” हर सुबह जब सूरज उदित होता है, वह यह संदेश देता है
MAHAKAL AARTI
MAHAKAL AARTI *महाकाल का अर्थ और महत्व (Importance of Mahakal)** “महाकाल” भगवान शिव का वह स्वरूप है जो (समय) के भी स्वामी हैं —
DUTTATREYA AARTI
DUTTATREYA AARTI दत्तात्रेय जी की आरती का महत्व (Importance of Dattatreya Aarti भगवान दत्तात्रेय त्रिमूर्ति — ब्रह्मा, विष्णु और महेश — तीनों के
VITTHAL AARTI
VITTHAL AARTI विठ्ठल जी की आरती – महत्व, लाभ, नियम और पूरा पाठ विठ्ठल जी की आरती का महत्व (Mahatva)** विठ्ठल जी, जिन्हें

TULSI AARTI
TULSI AARTI तुलसी माता की आरती, महत्व, लाभ और नियम *तुलसी का महत्व (Mahatva) तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि **धार्मिक और औषधीय महत्व वाली
NAVGRAH AARTI
NAVGRAH AARTI **नवग्रह आरती का महत्व, लाभ और नियम नवग्रह आरती का महत्व (Mahatva नवग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और
GAYATRI AARTI
GAYATRI AARTI गायत्री माता की आरती का महत्व, लाभ और नियम गायत्री माता का महत्व (Mahatva) **गायत्री देवी** मां को वेदों की जननी, ज्ञान और
KATYAYNI AARTI
KATYAYNI MA KI AARTI *कात्यायनी माता की आरती का महत्व, लाभ और नियम कात्यायनी माता का महत्व (Mahatva)** मां **कात्यायनी** नवदुर्गा का छठा स्वरूप हैं।
SHETALA AARTI
SHETALA MATA KI AARTI शीतला माता की आरती का महत्व, लाभ और नियम शीतला माता की आरती का महत्व (Mahatva) शीतला माता रोगों
ANNAPURNA AARTI
ANNAPURNA MATA KI AARTI अन्नपूर्णा माता की आरती का महत्व, लाभ और नियम अन्नपूर्णा माता की आरती का महत्व (Mahatva) अन्नपूर्णा माता देवी माँ पार्वती
GANGA AARTI
Add Your Heading Text Here गंगा माता की आरती का महत्व, लाभ और नियम गंगा माता की आरती का महत्व (Mahatva) गंगा माता
CHANDRA AARTI
CHANDRA DEV KI AARTI **🌕 चंद्र देव की आरती – महत्व, लाभ और नियम 🌕** 🌙 **चंद्र देव का महत्व चंद्र देव को **मन, शांति,

Margashirsha Amavasya 2025 date, spiritual significance, rituals, mythological story (katha), powerful remedies, and spiritual benefits
Margashirsha Amavasya 2025 date, spiritual significance, rituals, mythological story (katha), powerful remedies, and spiritual benefits दिनांक एवं समय तारीख: बुधवार, 17 दिसंबर 2025 अमावस्या तिथि
SHANI DEV KI AARTI
SHANI DEV KI AARTI शनि देव हिंदू धर्म में न्याय के देवता माने गए हैं। वह नवग्रह में एक ऐसे ग्रह हैं और भगवान सूर्य
SANTOSHI MATA KI AARTI
SANTOSHI MATA KI AARTI संतोषी माता की आरती का महत्व लाभ और नियम महत्व 1- संतोषी माता की आरती करने से व्यक्ति के जीवन
MA SARSWATI KI AARTI
MA SARSWATI KI AARTI सरस्वती की आरती का महत्व / लाभ और नियम महत्व १-मां सरस्वती की आरती करने से विद्या धन, ज्ञान

