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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 19

Add Your Heading Text Here कार्तिक मास के 19वीं अध्याय इस प्रकार है ।इसमें एक राजा की कहानी है जो की धार्मिक और भक्ति में जीवन में अत्यधिक रुचि रखती है । उनकी प्रजा सुखी और खुशहाल थी राजा ने कार्तिक मास में विशेष रूप से पूजा और व्रत आदि किया था और उन्होंने अपनी […]

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 18

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 18 कार्तिक मास का 18 अध्याय इस प्रकार है ।रौद्र रूप धारण करते हुए महाप्रभु शंकर नदी पर सवार होकर के युद्ध भूमि पर उपस्थित हुए उनको आया देखकर उनके सभी पराजित गण उनके साथ फिर से लौट आए और सिंह नाथ के जैसे घर गर्जन करते हुए दैत्य पर

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 17

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 17 कार्तिक मास का 17 अध्याय इस प्रकार है युद्ध के समय शिव जी के गण प्रबल हो चुके थे और उन्होंने जालंधर के शुंभ निशुंभ और महाअसुर कालनेमी को भी युद्ध में पराजित कर दिया थायह सब देख करके सागर पुत्र जालंधर एक महान और विशाल रथ पर सवार

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 16

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA- 16 कार्तिक मास के 16 अध्याय में राजा पृथ्वी ने नारद जी से कहा कि उसे समय राहु उस पुरुष से छूट करके कहां गया यह उन्हें बतलाएं इस पर नारद जी ने कहा कि दूत बर्बर नाम से प्रसिद्ध हो गया और नया जन्म पा करके वह धीरे-धीरे जलंधर

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 15

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 15 कार्तिक मास के 15 अध्याय में। नारद जी ने कहा कि उनके चले जाने के बाद जालंधर ने अपने राहु नाम के दूत को यह आज्ञा दी कि वह कैलाश पर्वत पर जाकर के भगवान शिव शंकर भोलेनाथ की सुंदर पत्नी के लिए मांग के लाए। यह सुनकर के

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 14

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 14 राजा पृथ्वी ने हाथ जोड़कर के देव मुनि नारद जी से भगवान की पूजा उनकी महिमा सुनने की इच्छा प्रकट की इस पर नारद जी ने कहा जो भगवान की श्रद्धा पूर्वक भजन भक्ति भाव करता है उसकी महिमा का क्या ही वर्णन किया जा सकता है लेकिन फिर

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 14

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 14   नारद जी बुद्धिमान जलंधर से प्रसन्न होकर बोले कि वाह स्वच्छा से कैलाश पर्वत पर गए थे जहां कल्पवृक्ष का वन है वहां उनको कामधेनुओं को विचारते हुए देखा साथ ही साथ चिंतामणि से प्रकाशित अदभुत और दिव्य रूप धारण किए हुए स्वर्णमयी छवि है उन्होन मन पार्वती

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Ashwin Amavasya 2025 date, Ashwin Amavasya, rituals, story (katha), powerful remedies, and spiritual benefits

Ashwin Amavasya 2025 date, spiritual and astrological significance, rituals, story (katha), powerful remedies, and spiritual benefits दिनांक एवं समय तारीख: रविवार, 19 अक्टूबर 2025 अमावस्या तिथि आरंभ: 18 अक्टूबर, 2025, दोपहर 12:40 बजे अमावस्या तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर, 2025, दोपहर 2:55 बजे इसे अमावस्या भी कहा जाता है महालया अमावस्या, सर्व पितृ अमावस्या, या महालया

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 13

KARTIK MAAS KI KATHA ADYAYA 13 कार्तिक मास के 13 अध्याय में नारद मुनि भगवान विष्णु और जालंधर के बीच में जो युद्ध चल रहा था उसके विषय में बतलाते हैं इसके साथ ही साथ भगवान विष्णु जालंधर से प्रसन्न होकर उसे वरदान भी प्रदान करते हैं जिससे वह अत्यधिक शक्तिशाली भी हो गया भगवान

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