BHADRA MAAS KI KATHA ADHYAYA 17

**भाद्रपद मास की 17वीं कथा: “नर-नारायण ऋषियों की कथा”**की विस्तृत व्याख्या की गई है

 

 📚 **कथा का प्रारंभ:**

 

पुराणों प्ले कथा अनुसार या मानता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की *त्रयोदशी तिथि* को **नर-नारायण ऋषियों** का प्राकट्य हुआ था। ये दोनों भगवान विष्णु के अंशावतार माने जाते हैं और बद्रीनाथ धाम में स्थित *बदरीवन* में तपस्या करते थे। नर और नारायण, आपस में दोनों भाई थे, जिन्होंने *धरती पर धर्म की स्थापना* और अपने तपोवल से से लोककल्याण* के लिए महान कार्य किए।

 

 🔱 **नर-नारायण की तपस्या का महत्व:**

 

हिमालय की गोद में जब नर और नारायण ऋषियों ने जन्म लिया, तो बचपन से ही वे *तप, ध्यान और संयम* में अत्यधिक रुचि रखने लगे। युवावस्था में दोनों ने सांसारिक सुखों को त्याग कर बदरीवन में जाकर **हजारों वर्षों तक कठोर तप** किया।

 

उनकी तपस्या इतनी प्रभावशाली थी कि देवता, असुर, गंधर्व, यक्ष सभी उनके तप के सामने नतमस्तक हो गए। उनकी शक्ति और प्रभाव को देखकर इंद्रदेव भी अत्यधिक चिंतित हो गए और उन्होंने *अप्सराओं* को भेजकर उनकी तपस्या भंग करवाने का प्रयास किया।

 

 🌺 **अप्सराओं की हार और नारायण की शक्ति:**

 

इंद्र ने उर्वशी, रंभा, मेनका जैसी सुंदर अप्सराओं को उनके पास भेजा। वे पुष्प वर्षा करती हुई, नृत्य करती हुई नर-नारायण के पास पहुँचीं। लेकिन नर और नारायण ऋषि अडिग रहे।

 

**नारायण ऋषि ने अपने जंघा (जांघ) से एक और सुंदर अप्सरा उत्पन्न की**, जो इतनी सुंदर थी कि इंद्र की भेजी सभी अप्सराएँ लज्जित हो गईं। उस अप्सरा का नाम उन्होंने “**उर्वशी**” रखा और कहा:

 

> “हे देवगण! यह तुम्हारे लोक की शोभा बढ़ाएगी। हमें हमारे मार्ग से भटकाने की आवश्यकता नहीं। हमारा तप किसी स्वर्ग की इच्छा के लिए नहीं, अपितु *लोककल्याण और धर्मस्थापना* हेतु है।”

 

इंद्रदेव को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने क्षमा मांगी।

 

 🕉️ **भाद्रपद मास और नर-नारायण की महिमा:**

 

भाद्रपद मास में विशेषकर शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को नर-नारायण की पूजा और ध्यान करने से 

 

* मनुष्य को *अखंड तप शक्ति*, *धैर्य* और *धार्मिक जीवन* का मार्ग प्राप्त होता है।

* यह दिन संयम, ब्रह्मचर्य और साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

* नर-नारायण के ध्यान से *सभी दोष*, *पाप* और *मन की चंचलता* नष्ट होती है।

 

 

### 🙏 **पूजन विधि (भाद्रपद त्रयोदशी को):**

 

  1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पीले पुष्प, तुलसी पत्र, फल, धूप और दीप से भगवान नर-नारायण का पूजन करें।
  3. “ॐ नारायणाय नमः” मंत्र का जाप करें (108 बार)।
  4. ब्रह्मचर्य व्रत या उपवास रखें, फलाहार करें।
  5. भगवान विष्णु के “नारायण रूप” का ध्यान करें।

 

 

### ✨ **कथा से सीख:**

 

* **धर्म और संयम का मार्ग ही वास्तविक विजय देता है।**

* **इंद्रिय-निग्रह और तपस्या** से ही आत्मबल की प्राप्ति होती है।

* नर-नारायण की तरह जीवन में कोई भी कार्य *स्वार्थरहित सेवा और साधना* के लिए होना चाहिए।

 




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