KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 14
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 14 नारद जी बुद्धिमान जलंधर से प्रसन्न होकर बोले कि वाह स्वच्छा से कैलाश पर्वत पर गए थे जहां कल्पवृक्ष का वन है वहां उनको कामधेनुओं को विचारते हुए देखा साथ ही साथ चिंतामणि से प्रकाशित अदभुत और दिव्य रूप धारण किए हुए स्वर्णमयी छवि है उन्होन मन पार्वती […]
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 14 Read More »










