KARTIK MAAS KI KATHA

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 21

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 21 कार्तिक मास हिंदू धर्म में अत्यधिक शुभ पवित्र और महत्वपूर्ण महीना माना जाता है इस पूरे महीने में भगवान विष्णु की पूजा उपासना अत्यधिक श्रद्धा के साथ की जाती है इस महीने केदौरान जो भी व्रत, पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को करते हैं उससे मिलने वाले फल का […]

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 20

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 20 कार्तिक मास का 20 वा अध्याय इस प्रकार है ।इस प्रकार से समस्त ब्रह्म आदि देवताओं ने नतमस्तक होकर के भगवान शिव की आराधना और स्तुति करना आरंभ कर दिया । और कहने लगे है देवों के देव ! आप इस प्रकृति से भी परे हैं पार ब्रह्म हैं

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 19

Add Your Heading Text Here कार्तिक मास के 19वीं अध्याय इस प्रकार है ।इसमें एक राजा की कहानी है जो की धार्मिक और भक्ति में जीवन में अत्यधिक रुचि रखती है । उनकी प्रजा सुखी और खुशहाल थी राजा ने कार्तिक मास में विशेष रूप से पूजा और व्रत आदि किया था और उन्होंने अपनी

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 17

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 17 कार्तिक मास का 17 अध्याय इस प्रकार है युद्ध के समय शिव जी के गण प्रबल हो चुके थे और उन्होंने जालंधर के शुंभ निशुंभ और महाअसुर कालनेमी को भी युद्ध में पराजित कर दिया थायह सब देख करके सागर पुत्र जालंधर एक महान और विशाल रथ पर सवार

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 16

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA- 16 कार्तिक मास के 16 अध्याय में राजा पृथ्वी ने नारद जी से कहा कि उसे समय राहु उस पुरुष से छूट करके कहां गया यह उन्हें बतलाएं इस पर नारद जी ने कहा कि दूत बर्बर नाम से प्रसिद्ध हो गया और नया जन्म पा करके वह धीरे-धीरे जलंधर

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 15

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 15 कार्तिक मास के 15 अध्याय में। नारद जी ने कहा कि उनके चले जाने के बाद जालंधर ने अपने राहु नाम के दूत को यह आज्ञा दी कि वह कैलाश पर्वत पर जाकर के भगवान शिव शंकर भोलेनाथ की सुंदर पत्नी के लिए मांग के लाए। यह सुनकर के

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 14

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 14   नारद जी बुद्धिमान जलंधर से प्रसन्न होकर बोले कि वाह स्वच्छा से कैलाश पर्वत पर गए थे जहां कल्पवृक्ष का वन है वहां उनको कामधेनुओं को विचारते हुए देखा साथ ही साथ चिंतामणि से प्रकाशित अदभुत और दिव्य रूप धारण किए हुए स्वर्णमयी छवि है उन्होन मन पार्वती

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 14

KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 14 राजा पृथ्वी ने हाथ जोड़कर के देव मुनि नारद जी से भगवान की पूजा उनकी महिमा सुनने की इच्छा प्रकट की इस पर नारद जी ने कहा जो भगवान की श्रद्धा पूर्वक भजन भक्ति भाव करता है उसकी महिमा का क्या ही वर्णन किया जा सकता है लेकिन फिर

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KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAYA 13

KARTIK MAAS KI KATHA ADYAYA 13 कार्तिक मास के 13 अध्याय में नारद मुनि भगवान विष्णु और जालंधर के बीच में जो युद्ध चल रहा था उसके विषय में बतलाते हैं इसके साथ ही साथ भगवान विष्णु जालंधर से प्रसन्न होकर उसे वरदान भी प्रदान करते हैं जिससे वह अत्यधिक शक्तिशाली भी हो गया भगवान

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