Table of Contents
ToggleKARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4 शास्त्रों के अनुसार जो मनुष्य कार्तिक मास में प्रतिदिन गीता का पाठ करता है उसे अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। – कार्तिक माह के दौरान हर दिन गंगा स्नान, दान और दीपदान करने से कई गुने शुभ फल की प्राप्ति होती है। – कार्तिक महीने में तुलसी की विधि-विधान के साथ सुबह और शाम को पूजा और दीपक जरूर अर्पित करना चाहिए
कार्तिक मास व्रत कथा के चौथे अध्याय में भगवान ऋषि सूतजी नारज जी को आगे बताते है कि भगवान मछली के समान रूप धारण कर विन्ध्यवासी कश्यप ऋषि की अञ्जलि में आ पहुंचे, मछली ना तो कमंडल और ना ही तालाब में समा रही थी।
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4 नारदजी ने कहा: ऎसा कहकर भगवान विष्णु मछली का रूप धारण कर के आकाश से जल में गिरे। उस समय विन्ध्याचल पर्वत पर तप कर रहे महर्षि कश्यप अपनी अंजलि में जल लेकर खड़े थे। भगवान उनकी अंजलि में जा गिरे।
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4 महर्षि कश्यप ने दया कर के उसे अपने कमण्डल में रख लिया। मछली के थोड़ा बड़ा होने पर महर्षि कश्यप ने उसे कुएं में डाल दिया। जब वह मछली कुएं में भी न समा सकी तो उन्होंने उसे तालाब में डाल दिया, जब वह तालाब में भी न आ सकी तो उन्होंने उसे समुद्र में डाल दिया।
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4 वह मछली वहां भी बढ़ने लगी फिर मत्स्यरूपी भगवान विष्णु ने इस शंखासुर का वध किया और शंखासुर को हाथ में लेकर बद्रीवन में आ गये..
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4 वहाँ उन्होंने संपूर्ण ऋषियों को बुलाकर इस प्रकार आदेश दिया: मुनीश्वरों! तुम जल के भीतर बिखरे हुए वेदमंत्रों की खोज करो और जितनी जल्दी हो सके, उन्हें सागर के जल से बाहर निकाल लाओ तब तक मैं देवताओं के साथ प्रयाग में ठहरता हूँ।
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4 तब उन तपोबल सम्पन्न महर्षियों ने यज्ञ और बीजों सहित सम्पूर्ण वेद मन्त्रों का उद्धार किया। उनमें से जितने मंत्र जिस ऋषि ने उपलब्ध किए वही उन बीज मन्त्रों का उस दिन से ऋषि माना जाना लगा। तदनन्तर सब ऋषि एकत्र होकर प्रयाग में गये, वहाँ उन्होंने ब्रह्माजी सहित भगवान विष्णु को उपलब्ध हुए सभी वेद मन्त्र समर्पित कर दिए।
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4 सब वेदों को पाकर ब्रह्माजी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने देवताओं और ऋषियों के साथ प्रयाग में अश्वमेघ यज्ञ किया। यज्ञ समाप्त होने पर सब देवताओं ने भगवान से निवेदन किया: देवाधिदेव जगन्नाथ! इस स्थान पर ब्रह्माजी ने खोये हुए वेदों को पुन: प्राप्त किया है और हमने भी यहाँ आपके प्रसाद से यज्ञभाग पाये हैं।
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4 अत: यह स्थान पृथ्वी पर सबसे श्रेष्ठ, पुण्य की वृद्धि करने वाला एवं भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाला हो। साथ ही यह समय भी महापुण्यमय और ब्रह्मघाती आदि महापापियों की भी शुद्धि करने वाला हो तथा तय स्थान यहाँ दिये हुए दान को अक्षय बना देने वाला भी हो, यह वर दीजिए।
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4 भगवान विष्णु बोले: देवताओं! तुमने जो कुछ कहा है, वह मुझे स्वीकार है, तुम्हारी इच्छा पूर्ण हो। आज से यह स्थान ब्रह्मक्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध होगा, सूर्यवंश में उत्पन्न राजा भगीरथ यहाँ गंगा को ले आएंगे और वह यहाँ सूर्यकन्या यमुना से मिलेगी। ब्रह्माजी और तुम सब देवता मेरे साथ यहाँ निवास करो।
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4 आज से यह तीर्थ तीर्थराज के नाम से विख्यात होगा। तीर्थराज के दर्शन से तत्काल सब पाप नष्ट हो जाएंगे। जब सूर्य मकर राशि में स्थित होगें उस समय यहाँ स्नान करने वाले मनुष्यों के सब पापों का यह तीर्थ नाश करेगा। यह काल भी मनुष्यों के लिए सदा महान पुण्य फल देने वाला होगा।
KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4 माघ में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर यहाँ स्नान करने से सालोक्य आदि फल प्राप्त होंगे। देवाधिदेव भगवान विष्णु देवताओं से ऎसा कहकर ब्रह्माजी के साथ वहीं अन्तर्धान हो गये। तत्पश्चात इन्द्रादि देवता भी अपने अंश से प्रयाग में रहते हुए वहां से अन्तर्धान हो गये.. KARTIK MAAS KI KATHA ADHYAY 4
BHARAV AARTI
Add Your Heading Text Here भैरव बाबा की आरती का महत्व लाभ और नियम १- भैरव बाबा जिनको काल भैरव भी कहा जाता है।
SURYA AARTI
SURYA DEV KI AARTI सूर्य देव की आरती महत्व लाभ और उनके नियम सूर्य देव का महत्व १- सूर्य देव को संपूर्ण ब्रह्मांड

Paush Amavasya in 2025 falls on Friday, December 19. date, timing, significance, rituals, remedies, and spiritual benefitSamavasya ki kahani,
Paush Amavasya in 2025 falls on Friday, December 19. date, timing, significance, rituals, remedies, and spiritual benefitS दिनांक एवं तिथि तारीख: शुक्रवार, दिसंबर 19, 205
SATYANARAYAN AARTI
SATYANARAYAN AARTI सत्यनारायण भगवान का परिचय और महत्व (Importance of Satyanarayan Puja) सत्यनारायण भगवान** विष्णु जी का एक अवतार हैं।जो कि अपने आप
motivational story
अधूरी मंज़िल से मिली जीत”motivational story कहानी – “अधूरी मंज़िल से मिली जीत” हर सुबह जब सूरज उदित होता है, वह यह संदेश देता है
MAHAKAL AARTI
MAHAKAL AARTI *महाकाल का अर्थ और महत्व (Importance of Mahakal)** “महाकाल” भगवान शिव का वह स्वरूप है जो (समय) के भी स्वामी हैं —

