Shri Durga Saptashati Adhyay 2

NAVRATRI 2024 देवताओं के तेज से देवी का प्रादुर्भाव और महिषासुर की सेवा का वध

 

महर्षि मेधा बोले प्राचीन काल में देवताओं और असुरों में पूरे 100 वर्षों तक घोर युद्ध हुआ था उनमें असुरों का स्वामी महिषासुर था और देवराज इंद्र देवताओं के नायक थे इस युद्ध में देवताओं की सेवा परास्त हो गई थी और इस प्रकार संपूर्ण देवताओं को जीत महिषासुर इंद्र बन बैठा था युद्ध के पश्चात हारे हुए देवता प्रजापति श्री ब्रह्मा को साथ लेकर उसे स्थान पर पहुंचे जहां पर की भगवान शंकर विराजमान थे 

 

NAVRATRI 2024  देवताओं ने अपनी हार का सारा वृतांत भगवान विष्णु और शंकर जी से कह सुनाया वह कहने लगे हैं प्रभु! महिषासुर सूर्य, इंद्र, अग्नि,वायु, चंद्रमा, वरुण तथा अन्य देवताओं के सब अधिकार छीन कर सबका स्वामी बन बैठा है

 

NAVRATRI 2024  उसने समस्त देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया है वह मनुष्यों की तरह पृथ्वी पर विचार रहे हैं दैत्यों  की सारी करतूत हमने आपको सुना दी है और आपकी शरण में इसीलिए आए हैं कि आप उनके वध का कोई उपाय सोचें

 

NAVRATRI 2024  देवताओं की बातें सुनकर भगवान श्री विष्णु और शंकर जी को दैत्यो पर बड़ा गुस्सा आया,उनकी भौहें  तन गई और आंखें लाल हो गई, गुस्से में भरे हुए भगवान विष्णु के मुख से बड़ा भारी तेज निकला और उसी प्रकार का तेज भगवान शंकर ब्रह्मा और इंद्र आदि देवताओं के मुख से प्रकट हुआ फिर वह सारा तेज एक में मिल गया और तेज का वह पुंज ऐसे दिखता था जैसे की ज्वालामय पर्वत हो

 

NAVRATRI 2024 देवताओं ने देखा कि उसे पर्वत की ज्वाला चारों ओर फैली थीऔर देवताओं के शरीर से प्रकट हुए तेज की किसी अन्य तेज से तुलना नहीं हो सकती थी एक स्थान पर इकट्ठा होने पर वह तेज एक देवी के रूप में परिवर्तित हो गयाऔर अपने प्रकाश से तीनों लोकों में व्याप्त जान पड़ा

 

NAVRATRI 2024  वह भगवान शंकर का तेज था उस देवी का मुख प्रकट हुआ यमराज के तेज से उसके सिर के बाल बने, भगवान श्री विष्णु के तेज से उसकी भुजाएं बनी,चंद्रमा के तेज से दोनों स्तन और इंद्र के तेज से जंघा और पिंडली तथा पृथ्वी के तेज से नितंब भाग बना,ब्रह्मा के तेज से दोनों चरण और सूर्य के तेज से उनकी उंगलियां पैदा हुई और वसुओं के तेज से हाथों की उंगलियां एवं कुबेर के तेज से नासिक बनी,प्रजापति के तेज से उसके दांतऔर अग्नि के तेज से उसके नेत्र बने,संध्या के तेज से उनकी भौहें वायु के तेज से उनके कान प्रकट हुए थे इस प्रकार उसे देवी का प्रादुर्भाव हुआ था

 

NAVRATRI 2024  महिषासुर से पराजित देवता उसे देवी को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए भगवान शंकर ने अपने त्रिशूल में से एक त्रिशूल निकालकर उसे देवी को दिया और भगवान विष्णु ने अपने चक्र में से एक चक्र निकाल कर उसे देवी को दिया वरुण ने देवी को शंकर भेंट किया, अग्नि ने इसे शक्ति दी,वायु ने उसे धनुष और बाण दिए, सहत्र नेत्रों वाले श्री देवराज इंद्र नेउससे वज्र दिया और ऐरावत हाथी का एक घंटा उतार कर देवी को भेंट किया,यमराज ने उसे काल दंड दिया,वरुण ने उसे पाश दिया,प्रजापति ने इस स्फटिक की माला दी 

NAVRATRI 2024 और ब्रह्मा जी ने उसे कमंडलु दिया,सूर्य ने देवी के समस्त रोमो  में अपनी किरणों  का तेज भर दिया,और उनके साथ ही उसने दिव्य चूड़ामणि दी, दो कुंडल,कंकड़ ,उज्जवल अर्धचंद्र,बाहो  के लिए बाजूबंद,चरणों के लिए नूपुर,गले के लिए सुंदर हंसिली और उंगलियों के लिए रत्नो की बनी हुई अंगूठियां उसे दी,विश्वकर्मा ने उन्हें फरसा दिया और उसके साथ ही कई प्रकार के अस्त्र और अभेद कवच दिएऔर इसके अतिरिक्त उसने उसे कभी ना कुम्हलाने वाले सुंदर कमल की मलाई भेंट की

 

NAVRATRI 2024 समुद्र ने सुंदर कमल का फूल भेंट किया हिमालय ने सवारी के लिए सिंह और तरह-तरह के रतन देवी को भेंट किए यशराज कुबेर ने मधु से भरा हुआ पत्र और शेषनाग ने उन्हें बहुमूल्य मानो से विभूषित मणियो से विभूषित नागहार भेंट किया,इस तरह दूसरे देवताओं ने भी उसे आभूषण और अस्त्र देकर उसका सम्मान किया इसके पश्चात देवी ने उच्च स्वर से गर्जना की

 

NAVRATRI 2024 उसके इस भयंकर नाथ से आकाश गूंज उठाओ देवी का वह उच्च स्वर से किया हुआ सिंह नाथ समा ना सका, आकाश उसके सामने छोटा प्रतीत होने लगा,उससे वह बड़े जोर की प्रतिध्वनि हुई जिससे समस्त विश्व में हलचल मच गई और समुद्र काँप, उठे पृथ्वी डोलने लगी और सब के सब पर्वत हिलने लगे देवताओं ने उसे समय प्रसन्न हो सिंह वाहिनी जगत में देवी से कहा-हे देवी ! तुम्हारी जय हो इसके साथ महर्षियों ने भक्ति भाव से विनम्र होकर उनकी स्थिति की संपूर्ण त्रिलोकी को शोक मगन देखकर देवगण अपनी सेना  को साथ लेकर और हथियार आदि सजाकर उठ खड़े हुए,महिषासुर के क्रोध की कोई सीमा नहीं थी उसने क्रोध में भरकरकहा-यह सब क्या उत्पात  है?

 

NAVRATRI 2024 फिर वह अपनी सेना  के साथ उसी ओर दौड़ा,जहा भयंकर शब्द का नाम सुनाई दे रहा था और आगे पहुंचकर उसने देवी को देखा जो कि अपनी प्रभाव से तीनों लोको को प्रकाशित कर रही थी उसके चरणों के बाहर से पृथ्वी दबी जा रही थी माथे के मुकुट से आकाश में एक रेखा सी बन रही थी और उसके धनुष की टंकोर  से सब लोग क्षुब्ध हो रहे थे

 

NAVRATRI 2024 देवी अपने सहस्त्र भुजाओ को संपूर्ण दिशाओं में फैलाए खड़ी थी इसके पश्चात उनके दैत्यों के साथ युद्ध छिड़  गया और कई प्रकार के अस्त्रों-शस्त्रों से सब की सब दिशाएं उद्भाषित होने लगी,महिषासुर की सेवा का सेनापति चिक्षुर नामक एक महान असुर था वह आगे बढ़कर देवी के साथ युद्ध करने लगा और दूसरे दैत्यों की चतुरंगिणी सी साथ लेकर चामर भी लड़ने लगा और 7000 महारथियों  को साथ लेकर उदग्र नामक महादैत्य आकर युद्ध लगा,और महाहनू नामक असुर एक करोड़ रथियो को साथ लेकर,असिलोमा  नामक 5 करोड़ सैनिकों को साथ लेकर युद्ध करने लगा,वाष्कल  नमकअसुर 60 लाख असुरों के साथ युद्ध में आ डटा,विडाल नामक असुर एक करोड़ रथियो साथ लड़ने को तैयार हुआ था

 

NAVRATRI 2024 इन सब के अतिरिक्त और भी हजारों असुर हाथी और घोड़ा साथ लेकर लड़ने लगे और इन सब के पश्चात महिषासुर करोड़ हाथियों और घोड़े सहित वहां जाकर देवी के साथ लड़ने लगे,सभी असुर तोमर ,भिन्दिपाल, शक्ति, मूसल, खड्गो,फरसों, पटियो के साथ रणभूमि में देवी के साथ युद्ध करने लगे

 

NAVRATRI 2024 कई शक्तियां फेंकने लगे और कोई अन्य शस्त्रादि,इसके पश्चात सबके सब दैत्य अपनी अपनी तलवार हाथों में लेकर देवी की ओर दौड़े और उसे मार डालने का प्रयास करने लगे, मगर देवी ने क्रोध में भरकर खेल ही खेल में उनके सब अस्त्र शस्त्रों को काट दिया इसके पश्चात ऋषियों और देवताओं ने देवी की स्तुति आरंभ कर दी

NAVRATRI 2024 और वह प्रसन्न होकर असुरों के शरीरों पर अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करती रही,देवी का वहां भी क्रोध में भरकर दैत्य सेवा में इस प्रकार विचारने लगा जैसे कि वैन में दावानल फैल रहा हो,युद्ध करती हुई देवी ने क्रोध में भर जितने सांसों को छोड़ा वह तुरंत ही सैकड़ो हजारों गानों के रूप में परिवर्तित हो गए, फरसे, भिन्दिपाल,खड़ग  तथा पट्टिश इस इत्यादि अस्त्रों के साथ दैत्य से युद्ध करने लगे,

 

NAVRATRI 2024 देवी की शक्ति से बढे हुए वह गण दैत्यों का नाश करते हुए ढोल,शंख व मृदंग आदि बजा रहे थे देवी ने त्रिशूल, गदा, शक्ति, खड्ग इत्यादि से सहस्त्र असुरों को मार डाला,कितनों को घंटे की आवाज से यमलोक पहुंचा दिया,कितने ही असुरो  को उसने पाश में बांधकर पृथ्वी पर घसीटा,कितनों को अपनी तलवार से टुकड़े-टुकड़े कर दिए और कितनों को गदा की चोट से धरती पर सुला दिया

NAVRATRI 2024 कई दैत्य मुसल की मार से घायल होकर रक्त वमन करने लगे और कई शूल से छाती फट जाने के कारण पृथ्वी पर लेट गए और कितनों की बाण वर्षा से कमर टूट गई,देवताओं को पीड़ा देने वाले दैत्य कट-कट कर मरने लगे कितनों की बाहें अलग हो गई कितनो  की गर्दन कट गई,कितनों के सिर कट कर दूर भूमि पर लुढ़क गए,

कितनों के शरीर बीच में से कट गए और कितनों की जंघाए  कट गई और वह पृथ्वी पर गिर पड़े

NAVRATRI 2024

 

कितने ही सिरों व पैरों के काटने पर भी भूमि पर से उठ खड़े हुए और शस्त्र हाथ में लेकर देवी से लड़ने लगे और कई दैत्य गण भूमि में बाज़ो  की ध्वनि के साथ नाच रहे थे कई असुर जिनके सर कट चुके थे बिना सिर  के धड़  से ही हाथ में शस्त्र लिए हुए लड़ रहे थे

 

NAVRATRI 2024 दैत्य  रह-रहकर ठहरो! ठहरो! कहते हुए देवी को युद्ध के लिए ललकार रहे थे,जहां पर घोर संग्राम हुआ था वहां की भूमि रथ हाथी घोड़े और असुरों के लाशों से भरी हुई थी और असुर सेवा के बीच में रक्तपात होने के कारण रुधिर की नदियां बह रही थी और इस तरह देवी ने असुरों के विशाल सी को क्षण भर में इस तरह से नष्ट कर डाला,जैसे तृण काष्ठ के बड़े समूह को अग्नि नष्ट कर डालती है और देवी का सिंह भी गर्दन  के बालों को हिलता हुआ और बड़ा शब्द करता हुआ असुरों के शरीरों से मानो उनके प्राणों को ढूंढ रहा था वहां  देवी के ने गढ़ो जब दैत्यों के साथ युद्ध किया तो देवताओं ने प्रसन्न होकर आकाश से उन पर पुष्प की वर्षा की  

NAVRATRI 2024 



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