(नियम, विधि और लाभ)
नियम (Niyam)
- शारीरिक शुद्धि:
- प्रातः स्नान कर के शुद्ध एवं स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- विशेष रूप से सफेद, पीला या लाल रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- प्रातः स्नान कर के शुद्ध एवं स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- स्थान की शुद्धता:
- पाठ करने का स्थान साफ-सुथरा और शांतिपूर्ण होना चाहिए।
- वहां एक चौकी पर श्री गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- पाठ करने का स्थान साफ-सुथरा और शांतिपूर्ण होना चाहिए।
- मन की शुद्धि:
- पाठ से पहले मन को शांत करें।
- नकारात्मक विचारों से बचें और भक्ति भाव से भरपूर रहें।
- पाठ से पहले मन को शांत करें।
- भोजन में सात्विकता:
- केवल सात्विक और शुद्ध भोजन करें।
- पाठ काल में मांसाहार, मद्यपान और तामसिक आहार का त्याग करें।
- केवल सात्विक और शुद्ध भोजन करें।
- समय का नियम:
- प्रातः काल (ब्रह्म मुहूर्त) सबसे उत्तम है।
- चतुर्थी, गणेश चतुर्थी, मंगलवार, बुधवार के दिन विशेष फल मिलता है।
- संकटों से बचने के लिए किसी भी शुभ दिन से आरंभ कर सकते हैं।
- प्रातः काल (ब्रह्म मुहूर्त) सबसे उत्तम है।
- आसन और दिशा:
- ऊन या कुश का आसन बिछाकर बैठें।
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पाठ करें।
- ऊन या कुश का आसन बिछाकर बैठें।
- नियमितता:
- यदि पाठ को एक साधना के रूप में किया जा रहा है (जैसे 11, 21, 40 दिनों का व्रत), तो लगातार बिना बाधा के करना चाहिए।
- यदि पाठ को एक साधना के रूप में किया जा रहा है (जैसे 11, 21, 40 दिनों का व्रत), तो लगातार बिना बाधा के करना चाहिए।
विधि (Vidhi)
- संकल्प (Sankalp):
- पाठ प्रारंभ करने से पहले संकल्प करें:
(“मैं अपने समस्त विघ्नों के नाश और सुख-समृद्धि प्राप्ति के लिए श्री गणेश सहस्रनाम का पाठ करूँगा/करूँगी।”)
- पाठ प्रारंभ करने से पहले संकल्प करें:
- आचमन और शुद्धि:
- जल से आचमन कर अपने शरीर और मन को शुद्ध करें।
- जल से आचमन कर अपने शरीर और मन को शुद्ध करें।
- धूप, दीप, नैवेद्य अर्पण:
- श्री गणेश जी के समक्ष दीपक, अगरबत्ती, फूल और नैवेद्य (मोदक, दूर्वा, लड्डू आदि) अर्पित करें।
- श्री गणेश जी के समक्ष दीपक, अगरबत्ती, फूल और नैवेद्य (मोदक, दूर्वा, लड्डू आदि) अर्पित करें।
- गणपति ध्यान (Dhyana):
- श्री गणेश जी के दिव्य स्वरूप का ध्यान करें:
- गजमुखी, एकदंत, लड्डूप्रिय, मोदकधारी, मुषकवाहन।
- गजमुखी, एकदंत, लड्डूप्रिय, मोदकधारी, मुषकवाहन।
- श्री गणेश जी के दिव्य स्वरूप का ध्यान करें:
- सहस्रनाम पाठ (Paath):
- श्रद्धा और भावनापूर्वक 1000 नामों का उच्चारण करें।
- प्रत्येक नाम का उच्चारण स्पष्ट और प्रेमपूर्वक करें।
- श्रद्धा और भावनापूर्वक 1000 नामों का उच्चारण करें।
- पुष्प अर्पण (Pushpanjali):
- प्रत्येक नाम पर या प्रत्येक शतक (100 नामों) के बाद पुष्प अर्पित करें (यदि संभव हो)।
- दूर्वा (तीन या पांच पत्तियों वाली) भी अर्पित करना अति शुभ होता है।
- प्रत्येक नाम पर या प्रत्येक शतक (100 नामों) के बाद पुष्प अर्पित करें (यदि संभव हो)।
- पूर्णाहुति (Purnahuti):
- पाठ के अंत में गणेश जी की आरती करें।
- उन्हें मोदक, लड्डू आदि का भोग अर्पित करें और प्रसाद स्वरूप बांटें।
- पाठ के अंत में गणेश जी की आरती करें।
- क्षमा प्रार्थना (Kshama Prarthana):
- पाठ के दौरान हुई किसी भी त्रुटि के लिए श्री गणेश जी से क्षमा याचना करें।
- पाठ के दौरान हुई किसी भी त्रुटि के लिए श्री गणेश जी से क्षमा याचना करें।
लाभ (Benefits)
- सभी विघ्नों का नाश:
- जीवन के समस्त विघ्न, बाधाएँ, रुकावटें दूर होती हैं।
- नए कार्यों की सफलता सुनिश्चित होती है।
- जीवन के समस्त विघ्न, बाधाएँ, रुकावटें दूर होती हैं।
- संकटों में रक्षा:
- अचानक आने वाले संकटों, भय और दुर्घटनाओं से बचाव होता है।
- अचानक आने वाले संकटों, भय और दुर्घटनाओं से बचाव होता है।
- धन, वैभव और सुख-समृद्धि:
- आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
- घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
- आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
- विद्या और बुद्धि में वृद्धि:
- विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और ज्ञान साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
- मेधा शक्ति, स्मरण शक्ति और विवेक बढ़ता है।
- विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और ज्ञान साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
- मानसिक शांति और आत्मबल:
- तनाव, चिंता, भय आदि दूर होते हैं।
- मनोबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
- तनाव, चिंता, भय आदि दूर होते हैं।
- कर्मों का शुद्धिकरण:
- दुष्कर्मों का शमन होता है और शुभ कर्मों में प्रवृत्ति बढ़ती है।
- दुष्कर्मों का शमन होता है और शुभ कर्मों में प्रवृत्ति बढ़ती है।
- पारिवारिक सुख-संपत्ति:
- घर में प्रेम, सामंजस्य और संतान सुख बढ़ता है।
- वंश वृद्धि के इच्छुक साधकों को विशेष लाभ मिलता है।
- घर में प्रेम, सामंजस्य और संतान सुख बढ़ता है।
- आध्यात्मिक उन्नति:
- साधक को सिद्धि, ऋद्धि और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता मिलती है।
- साधक को सिद्धि, ऋद्धि और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता मिलती है।
🌸 पाठ से पूर्व संकल्प मंत्र (बोल सकते हैं):
“मम समस्त विघ्न विनाशार्थं, सुख-समृद्धि सिद्ध्यर्थं, श्री गणेश सहस्रनाम पाठं करिष्ये।”
(अर्थ: “मैं अपने समस्त विघ्नों के नाश तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति हेतु श्री गणेश सहस्रनाम का पाठ करूँगा/करूँगी।”)
🌸
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