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ToggleSHRI RAM KE 108 NAAM, BENEFITS, RITUALS, NIYAM
भगवान श्रीराम हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता हैं, जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। वे धर्म, मर्यादा, करुणा, सत्य और न्याय के प्रतीक हैं। श्रीराम का नाम स्वयं ब्रह्मस्वरूप माना गया है। राम नाम का उच्चारण करने मात्र से ही मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्धता प्राप्त होती है।
श्रीराम नाम जप के लाभ (Benefits of Chanting Shri Ram’s Name):
लाभ | विवरण |
1. मानसिक शांति | राम नाम जप करने से तनाव और चिंता दूर होती है। |
2. आत्मा की शुद्धि | यह नाम आत्मा को निर्मल करता है और पवित्रता लाता है। |
3. पापों का नाश | पिछले जन्मों और वर्तमान जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है। |
4. मोक्ष की प्राप्ति | राम नाम का जप अंत समय में मोक्ष प्रदान करता है। |
5. सद्गुणों का विकास | व्यक्ति में विनम्रता, करुणा, धैर्य और मर्यादा जैसे गुण आते हैं। |
6. रोगों से राहत | यह नाम शरीर को ऊर्जावान और स्वस्थ रखता है। |
7. बाधाओं का निवारण | जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती हैं। |
श्रीराम नाम मंत्र (Shri Ram Naam Mantras):
- ॐ श्रीरामाय नमः
- राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं राम नाम वरानने॥
📿 इन मंत्रों का 108 बार या जितना संभव हो, नियमित जप करें।
अनुष्ठान (Rituals) – श्रीराम के नाम की उपासना विधि
- प्रातः स्नान कर शुद्ध होकर श्रीराम का ध्यान करें।
- घर में तुलसी के पास दीपक जलाकर राम नाम का जप करें।
- हनुमान जी के समक्ष राम नाम जप अधिक प्रभावी माना जाता है।
- रामायण का पाठ करें (विशेषकर सुंदरकांड)।
रामनवमी, विजयदशमी, और एकादशी जैसे पावन दिनों पर विशेष पूजन करें।
नियम (Niyam) – श्रीराम नाम जप करते समय ध्यान रखने योग्य बातें:
नियम | विवरण |
1. नित्य जप का नियम बनाएं | नियमित जप करने से ही सच्चा फल प्राप्त होता है। |
2. मन, वाणी और कर्म की शुद्धता | सत्य, अहिंसा, और सेवा में जीवन बिताएं। |
3. एकाग्र चित्त से नाम जप करें | मन को भटकने न दें, ध्यानपूर्वक राम नाम लें। |
4. संयमित जीवनशैली अपनाएं | सात्त्विक भोजन और मर्यादित आचरण आवश्यक है। |
5. ब्रह्ममुहूर्त में जप श्रेष्ठ होता है | प्रातः 4 से 6 बजे का समय सर्वोत्तम है। |
श्रीराम को प्रिय वस्तुएँ (Things Loved by Shri Ram):
- तुलसी पत्र
- चंदन
- गाय का दूध और घी
- श्रीरामचरितमानस का पाठ
- भक्ति और विनम्रता
- अन्नदान एवं सेवा भाव
विशेष सुझाव श्रीराम कृपा हेतु:
- प्रतिदिन “श्रीराम जय राम जय जय राम” का जप करें।
- सप्ताह में एक दिन केवल श्रीराम नाम स्मरण का व्रत रखें।
- जरूरतमंदों की सहायता करें, क्योंकि श्रीराम करुणा के देवता हैं।
- अपने व्यवहार और वाणी में मर्यादा रखें, यही सच्चा श्रीराम भजन है।
श्रीराम नाम स्मरण का महत्व संतों की दृष्टि से:
- तुलसीदास जी कहते हैं – “राम नाम बिनु गति नहीं कोई, जो जपै राम पाय विश्रांति सोई।”
- स्वामी रामानंद ने कहा – “राम नाम जप बिना भवसागर पार नहीं।”
महात्मा गांधी ने अंतिम समय “हे राम” कहा था – यह नाम जीवन की अंतिम शक्ति बन सकता है।
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क्र.सं. | संस्कृत नाम | मंत्र | अर्थ |
1 | श्रीराम | ॐ श्रीरामाय नमः । | जिनमें योगीजन रमण करते हैं |
2 | रामचन्द्र | ॐ रामभद्राय नमः । | चंद्रमा के समान आनन्दमयी एवं मनोहर राम |
3 | रामभद्र | ॐ रामचंद्राय नमः । | कल्याणमय राम |
4 | शाश्वत | ॐ शाश्वताय नमः । | सनातन राम |
5 | राजीवलोचन | ॐ राजीवलॊचनाय नमः । | कमल के समान नेत्रोंवाले |
6 | श्रीमान् राजेन्द्र | ॐ राजॆंद्राय नमः । | श्री सम्पन्न राजाओं के भी राजा, चक्रवर्ती सम्राट |
7 | रघुपुङ्गव | ॐ रघुपुंगवाय नमः । | रघुकुल में श्रेष्ठ |
8 | जानकीवल्लभ | ॐ जानकीवल्लभाय नमः । | जनककिशोरी सीता के प्रियतम |
9 | जैत्र | ॐ चैत्राय नमः । | विजयशील |
10 | जितामित्र | ॐ जितमित्राय नमः । | शत्रुओं को जीतनेवाला |
11 | जनार्दन | ॐ जनार्दनाय नमः । | सम्पूर्ण मनुष्यों द्वारा याचना करने योग्य |
12 | विश्वामित्रप्रिय | ॐ विश्वामित्र प्रियाय नमः । | विश्वामित्रजी के प्रियतम |
13 | दांत | ॐ दांताय नमः । | जितेंद्रिय |
14 | शरण्यत्राणतत्पर | ॐ शरण्यत्राणतत्पराय नमः । | शरणागतों के रक्षा में तत्पर |
15 | बालिप्रमथन | ॐ वालिप्रमथनाय नमः । | बालि नामक वानर को मारनेवाले |
16 | वाग्मी | ॐ वाग्मिनॆ नमः । | अच्छे वक्ता |
17 | सत्यवाक् | ॐ सत्यवाचॆ नमः । | सत्यवादी |
18 | सत्यविक्रम | ॐ सत्यविक्रमाय नमः । | सत्य पराक्रमी |
19 | सत्यव्रत | ॐ सत्यव्रताय नमः । | सत्य का दृढ़ता पूर्वक पालन करनेवाले |
20 | ०व्रतफल | ॐ व्रतधराय नमः । | सम्पूर्ण व्रतों के प्राप्त होने योग्य फलस्वरूप |
21 | सदा हनुमदाश्रय | ॐ सदाहनुमदाश्रिताय नमः । | निरंतर हनुमान जी के आश्रय |
22 | कौसलेय | ॐ कौसलॆयाय नमः । | कौसल्याजी के पुत्र |
23 | खरध्वंसी | ॐ खरध्वंसिनॆ नमः । | खर नामक राक्षस का नाश करनेवाले |
24 | विराधवध | ॐ विराधवधपंडिताय नमः । | विराध नामक दैत्य का वध करने में कुशल |
25 | विभीषण-परित्राता | ॐ विभीषणपरित्राणाय नमः । | विभीषण के रक्षक |
26 | दशग्रीवशिरोहर | ॐ हरकॊदंडखंडनाय नमः । | दशशीश रावण के मस्तक काटनेवाले |
27 | सप्ततालप्रभेता | ॐ सप्तताळप्रभॆत्त्रॆ नमः । | सात ताल वृक्षों को एक ही बाण से बींध डालनेवाले |
28 | हरकोदण्ड-खण्डन | ॐ दशग्रीवशिरॊहराय नमः । | जनकपुर में शिवजी के धनुष को तोड़नेवाले |
29 | जामदग्न्यमहादर्पदलन | ॐ जामदग्न्यमहादर्प दळनाय नमः । | परशुरामजी के महान अभिमान को चूर्ण करनेवाले |
30 | ०ताडकान्तकृत | ॐ ताटकांतकाय नमः । | ताड़का नामवाली राक्षसी का वध करनेवाले |
31 | वेदान्तपार | ॐ वॆदांतसाराय नमः । | वेदान्त के पारंगत विद्वान अथवा वेदांत से भी अतीत |
32 | वेदात्मा | ॐ वॆदात्मनॆ नमः । | वेदस्वरूप |
33 | भवबन्धैकभेषज | ॐ भवरॊगैकस्यभॆषजाय नमः । | संसार बन्धन से मुक्त करने के लिये एकमात्र औषधरूप |
34 | दूषणप्रिशिरोsरि | ॐ दूषणत्रिशिरॊहंत्रॆ नमः । | दूषण और त्रिशिरा नामक राक्षसों के शत्रु |
35 | त्रिमूर्ति | ॐ त्रिमूर्तयॆ नमः । | ब्रह्मा,विष्णु और शिव तीन रूप धारण करनेवाले |
36 | त्रिगुण | ॐ त्रिगुणात्मकाय नमः । | त्रिगुणस्वरूप अथवा तीनों गुणों के आश्रय |
37 | त्रयी | ॐ त्रियी नमः । | तीन वेदस्वरूप |
38 | त्रिविक्रम | ॐ त्रिविक्रमाय नमः । | वामन अवतार में तीन पगों से समस्त त्रिलोकीको नाप लेनेवाले |
39 | त्रिलोकात्मा | ॐ त्रिलॊकात्मनॆ नमः । | तीनों लोकों के आत्मा |
40 | ०पुण्यचारित्रकीर्तन | ॐ पुण्यचारित्रकीर्तनाय नमः । | जिनकी लीलाओं का कीर्तन परम पवित्र हैं, ऐसे |
41 | त्रिलोकरक्षक | ॐ त्रिलॊकरक्षकाय नमः । | तीनों लोकोंकी रक्षा करनेवाले |
42 | धन्वी | ॐ धन्विनॆ नमः । | धनुष धारण करनेवाले |
43 | दण्डकारण्यवासकृत् | ॐ दंडकारण्यकर्तनाय नमः । | दण्डकारण्य में निवास करनेवाले |
44 | अहल्यापावन | ॐ अहल्याशापशमनाय नमः । | अहल्याको पवित्र करनेवाले |
45 | पितृभक्त | ॐ पितृभक्ताय नमः । | पिता के भक्त |
46 | वरप्रद | ॐ वरप्रदाय नमः । | वर देनेवाले |
47 | जितेन्द्रिय | ॐ जितॆंद्रियाय नमः । | इन्द्रियों को काबू में रखनेवाले |
48 | जितक्रोध | ॐ जितक्रॊधाय नमः । | क्रोध को जीतनेवाले |
49 | जितलोभ | ॐ जितमित्राय नमः । | लोभ की वृत्ति को परास्त करनेवाले |
50 | ०जगद्गुरु | ॐ जगद्गुरवॆ नमः । | अपने आदर्श चरित्रोंसे सम्पूर्ण जगत् को शिक्षा देनेके कारण सबके गुरु |
51 | ऋक्षवानरसंघाती | ॐ यक्षवानरसंघातिनॆ नमः । | वानर और भालुओं की सेना का संगठन करनेवाले |
52 | चित्रकूट–समाश्रय | ॐ चित्रकूटसमाश्रयाय नमः । | वनवास के समय चित्रकूट पर्वत पर निवास करनेवाले |
53 | जयन्तत्राणवरद | ॐ जयंतत्राणवरदाय नमः । | जयन्त के प्राणों की रक्षा करके उसे वर देनेवाले |
54 | सुमित्रापुत्र- सेवित | ॐ सुमित्रापुत्रसॆविताय नमः । | सुमित्रानन्दन लक्ष्मण के द्वारा सेवित |
55 | सर्वदेवाधिदेव | ॐ सर्वदॆवाधिदॆवाय नमः । | सम्पूर्ण देवताओं के भी अधिदेवता |
56 | मृतवानरजीवन | ॐ मृतवानरजीवनाय नमः । | मरे हुए वानरों को जीवित करनेवाले |
57 | मायामारीचहन्ता | ॐ मायामारीचहंत्रॆ नमः । | मृग का रूप में आये हुए मारीच नामक राक्षस का वध करनेवाले |
58 | महाभाग | ॐ महादॆवाय नमः । | महान सौभाग्यशाली |
59 | महाभुज | ॐ महाभुजाय नमः । | बड़ी बड़ी बाँहोंवाले |
60 | ०सर्वदेवस्तुत | ॐ सर्वदॆवस्तुताय नमः । | सम्पूर्ण देवता जिनकी स्तुति करते हैं, ऐसे |
61 | सौम्य | ॐ स्ॐयाय नमः । | शांतस्वभाव |
62 | ब्रह्मण्य | ॐ ब्रह्मण्याय नमः । | ब्राह्मणों के हितैषी |
63 | मुनिसत्तम | ॐ मुनिसंस्तुताय नमः । | मुनियोंमे श्रेष्ठ |
64 | महायोगी | ॐ महायॊगिनॆ नमः । | सम्पूर्ण योगोंके अधीष्ठान होने के कारण महान योगी |
65 | महोदर | ॐ महॊदराय नमः । | परम उदार |
66 | सुग्रीवस्थिर-राज्यपद | ॐ सुग्रीवॆप्सितराज्यदाय नमः । | सुग्रीव को स्थिर राज्य प्रदान करनेवाले |
67 | सर्वपुण्याधिकफलप्रद | ॐ सर्वपुण्याधिकफलाय नमः । | सम्स्त पुण्यों के उत्कृष्ट फलरूप |
68 | स्मृतसर्वाघनाशन | ॐ स्मृतसर्वाघनाशनाय नमः । | स्मरण करनेमात्र से ही सम्पूर्ण पापों का नाश करनेवाले |
69 | आदिपुरुष | ॐ आदिपुरुषाय नमः । | ब्रह्माजीको भी उत्पन्न करनेके कारण सब के आदिभूत अन्तर्यामी परमात्मा |
70 | ०महापुरुष | ॐ परम पुरुषाय नमः । | समस्त पुरुषों मे महान |
71 | परम | ॐ महापुरुषाय नमः । | सर्वोत्कृष्ट पुरुष |
72 | पुण्योदय | ॐ पुण्यॊदयाय नमः । | पुण्य को प्रकट करनेवाले |
73 | महासार | ॐ दयासाराय नमः । | सर्वश्रेष्ठ सारभूत परमात्मा |
74 | पुराणपुरुषोत्तम | ॐ पुराणपुरुषॊत्तमाय नमः । | पुराणप्रसिद्ध क्षरअक्षर पुरुषोंसे श्रेष्ठ लीलापुरुषोत्तम |
75 | स्मितवक्त्र | ॐ स्मितवक्त्राय नमः । | जिनके मुखपर सदा मुस्कानकी छटा छायी रहती है, ऐसे |
76 | मितभाषी | ॐ मितभाषिणॆ नमः । | कम बोलनेवाले |
77 | पूर्वभाषी | ॐ पूर्वभाषिणॆ नमः । | पूर्ववक्ता |
78 | राघव | ॐ राघवाय नमः । | रघुकुल में अवतीर्ण |
79 | अनन्तगुण गम्भीर | ॐ अनंतगुणगंभीराय नमः । | अनन्त कल्याणमय गुणों से युक्त एवं गम्भीर |
80 | ०धीरोदात्तगुणोत्तर | ॐ धीरॊदात्तगुणॊत्तराय नमः । | धीरोदात्त नायकके लोकोतर गुणों से युक्त |
81 | मायामानुषचारित्र | ॐ मायामानुषचारित्राय नमः । | अपनी मायाका आश्रय लेकर मनुष्योंकीसी लीलाएँ करनीवाले |
82 | महादेवाभिपूजित | ॐ महादॆवादिपूजिताय नमः । | भगवान शंकर के द्वारा निरन्तर पूजित |
83 | सेतुकृत | ॐ सॆतुकृतॆ नमः । | समुद्रपर पुल बाँधनेवाले |
84 | जितवारीश | ॐ जितवाराशयॆ नमः । | समुद्रको जीतनेवाले |
85 | सर्वतीर्थमय | ॐ सर्वतीर्थमयाय नमः । | सर्वतीर्थस्वरूप |
86 | हरि | ॐ हरयॆ नमः । | पापताप को हरनेवाले |
87 | श्यामाङ्ग | ॐ श्यामांगाय नमः । | श्याम विग्रहवाले |
88 | सुन्दर | ॐ सुंदराय नमः । | परम मनोहर |
89 | शूर | ॐ शूराय नमः । | अनुपम शौर्यसे सम्पन्न वीर |
90 | ०पीतवासा | ॐ पीतवासाय नमः । | पीताम्बरधारी |
91 | धनुर्धर | ॐ धनुर्धराय नमः । | धनुष धारण करनेवाले |
92 | सर्वयज्ञाधिप | ॐ सर्वयज्ञाधिपाय नमः । | सम्पूर्ण यज्ञों के स्वामी |
93 | यज्ञ | ॐ यज्ञाय नमः । | यज्ञ स्वरूप |
94 | जरामरणवर्जित | ॐ जरामरणवर्जिताय नमः । | बुढ़ापा और मृत्यु से रहित |
95 | शिवलिंगप्रतिष्ठाता | ॐ विभीषण प्रतिष्ठात्रॆ नमः । | रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंग की स्थापना करनेवाले |
96 | सर्वाघगणवर्जित | ॐ सर्वापगुणवर्जिताय नमः । | समस्त पापराशियों से रहित |
97 | परमात्मा | ॐ परमात्मनॆ नमः । | परमश्रेष्ठ, नित्यशुद्ध-बुद्ध –मुक्तस्वरूपा |
98 | परं ब्रह्म | ॐ परस्मैब्रह्मणॆ नमः । | सर्वोत्कृष्ट, सर्वव्यापी एवं सर्वाधिष्ठान परमेश्वर |
99 | सच्चिदानन्दविग्रह | ॐ सच्चिदानंदविग्रहाय नमः । | सत्, चित् और आनन्द ही जिनके स्वरूप का निर्देश करानेवाला है |
100 | ०परं ज्योति | ॐ परस्मैज्यॊतिषॆ नमः ।
| परम प्रकाशमय,परम ज्ञानमय |
101 | परं धाम | ॐ परस्मैधाम्नॆ नमः । | सर्वोत्कृष्ट तेज अथवा साकेतधामस्वरूप |
102 | पराकाश | ॐ पराकाशाय नमः । | त्रिपाद विभूतिमें स्थित परमव्योम नामक वैकुण्ठधामरूप, महाकाशस्वरूप ब्रह्म |
103 | परात्पर | ॐ परात्परस्मै नमः । | पर इन्द्रिय, मन, बुद्धि आदि से भी परे परमेश्वर |
104 | परेश | ॐ परॆशाय नमः । | सर्वोत्कृष्ट शासक |
105 | पारग | ॐ पारगाय नमः । | सबकोपार लगानेवाले अथवा मायामय जगत की सीमा से बाहर रहनेवाले |
106 | पार | ॐ पाराय नमः । | भवसागर से पार जाने की इच्छा रखनेवाले प्राणियों के प्राप्तव्य परमात्मा |
107 | सर्वभूतात्मक | ॐ सर्वदॆवात्मकाय नमः । | सर्वभूतस्वरूप |
108 | शिव | ॐ परस्मै नमः । | परम कल्याणमय |
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