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ToggleSIGNIFICANCE OF MOUNI AMAVASYA 2025/VRAT KATHA/DAAN /RITUALS
MOUNI AMAVASYA KAB HAI?
MOUNI AMAVASYA KAB HAI?
- Mauni Amavasya 2025: इस बार मौनी अमावस्या की तिथि बुधवार के दिन पड़ रही है। पंचांग के अनुसार, जनवरी 28, 2025 को शाम 07:35 बजे से अमावस्या तिथि शुरू होगी और जनवरी 29, 2025 को शाम 06:05 बजे तक समाप्त होगी।
- मौनी अमावस्या पापों से मुक्ति, अमृत स्नान और मोक्ष के लिए मनाया जाता है। इस दिन कई लोग अपने पितरों का तर्पण भी करते हैं। इस दिन स्नान करने और दान करने का विशेष महत्व है, लेकिन साथ ही इस दिन मौन व्रत भी करने की सलाह दी जाती है। मौन व्रत का पालन व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति, आत्मसंयम और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है
MOUNI AMAVASYA VRAT KATH 2025 मौनी अमावस्या की व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, कांचीपुरी में एक ब्राह्मण अपनी पत्नी धनवती, सात बेटों और बेटी गुणवती के साथ रहा करता था। उस ब्राह्मण का नाम देवस्वामी था। देवस्वामी के सातों बेटों का विवाह हो गया, लेकिन बेटी गुणवती अभी भी कुवांरी थी। इसलिए देवस्वामी ने अपने बड़े बेटे को गुणवती के लिए सुयोग्य वर ढूंढने का कार्य सौंपा।
इसी बीच एक दिन एक पंडित ने गुणवती की कुंडली देखी और बताया कि गुणवती के कुंडली में मौजूद दोष के कारण गुणवती विवाह के तुरंत बाद विधवा हो जाएगी। ऐसा सुनकर देवस्वामी के पैरों तले जमीन खिसक गई। घबराते हुए उसने पंडितजी से इस घोर संकट से बचने का उपाय पूछा।
तब पंडितजी ने कहा कि – “सिंहल द्वीप में सोमा नाम की एक धोबिन रहती है, वह विष्णु जी की परम भक्त है। उसे यहां ले आओ, उसकी पूजा में इतनी शक्ति है कि वह गुणवती को विधवा होने से बचा सकती है।”
पंडित के कहने पर देवस्वामी का छोटा बेटा और गुणवती स्वयं सोमा को लाने के लिए निकल पड़े। रास्ते में सागर पार करने के बाद थके-हारे दोनों भाई-बहन एक पेड़ के नीचे आराम करने लगे। उस पेड़ पर एक गिद्ध का घोंसला भी था। उस घोंसले में गिद्ध के बच्चे थे, जो गुणवती और उसके भाई की बातों को सुन रहे थे। जब गिद्ध ने अपने बच्चों को खाना खिलाने की कोशिश की तो वह बच्चे खाना खाने से मना करते हुए बोले कि पहले इन इंसानों की मदद कीजिए तभी हम खाना खाएंगे। अपने बच्चों की जिद मान कर उस गिद्ध ने गुणवती और उसके भाई को सिंहल तक पहुंचा दिया, जहां धोबिन सोमा का घर था।
अब दोनों भाई-बहन सोमा को खुश करने के लिए तरकीबें सोचते रहे। हर सुबह दोनों भाई-बहन सोमा को प्रसन्न करने के लिए उसका घर साफ करके घर की लीपा-पोती करने लगे। जब सोमा ने अपनी बहुओं से इस बारे में पूछा तो उसकी बहुओं ने उससे झूठ बोला की घर की साफ-सफाई बहुएं स्वयं ही करती हैं। किन्तु सोमा भी अत्यंत चतुर थी उसने अगली सुबह जल्दी उठकर गुणवती और उसके भाई को साफ-सफाई करते हुए देख लिया। वह दोनों के काम से बहुत ही खुश हुई और सारी बात जानकर दोनों के साथ उनके गांव चलने के लिए तैयार हो गई।
चलते समय सोमा ने अपनी बहुओं से कहा कि मेरी अनुपस्थिति में यदि किसी का देहान्त हो जाए तो उसका दाह-संस्कार मत करना। बल्कि मेरे वापस आने की प्रतीक्षा करना।
और फिर सोमा बहन-भाई के साथ कांचीपुरी पहुंच गई। दूसरे दिन गुणवती के विवाह का कार्यक्रम तय हो गया। कुंडली दोष के अनुसार सप्तपदी होते ही गुणवती के पति का देहांत हो गया। सोमा ने तुरन्त अपने संचित पुण्यों का फल गुणवती को प्रदान कर दिया। जिसके फलस्वरूप तुरन्त ही उसका पति जीवित हो उठा। सोमा उन्हें आशीर्वाद देकर अपने घर चली आई। उधर गुणवती को पुण्य-फल देने से सोमा के पुत्र, जमाई तथा पति की मृत्यु हो गई। उस दिन मौनी अमावस्या का दिन था। सोमा ने पुनः पुण्य फल संचित करने के लिए अश्वत्थ अर्थात पीपल के वृक्ष की छाया में विष्णुजी का पूजन करके 108 परिक्रमाएं की। अंतत: उसके परिवार के मृतक जन जीवित हो उठे, और इस प्रकार सोमा को उसकी निस्वार्थ भक्ति का महाफल प्राप्त हुआ।
इस प्रकार मौनी अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान कर विधिवत भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने व पीपल के पेड़ की परिक्रमा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है तथा परिवार के सदस्यों पर भगवान का आशीर्वाद सदैव बना रहता है। निष्काम भाव एवं भक्ति से सेवा का फल मधुर होता है, इस व्रत का यही लक्ष्य है। हम प्रार्थना करते हैं कि श्री विष्णु जी ने जैसे गुणवती और सोमा का कल्याण किया वैसे ही आप सभी का कल्याण हो।
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और जरूरतमंदों का दान करने से साधक के भाग्य में वृद्धि होती हैं, साथ ही पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। धार्मिक ग्रंथों में मौनी अमावस्या को पितरों का श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने के लिए उत्तम माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु और गणेश जी की आराधना करने से सभी दुखों का नाश होता है।
मौनी अमावस्या में किन चीजों का दान करना चाहिए?
1- मौनी अमावस्या के दिन गाय के दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है
2- इस दिन अगर भूमि का दान किया जाता है तो आर्थिक संपदा की प्राप्ति भी होती है
3- नमक का दान करने से समस्त बढ़ाओ से मुक्ति प्राप्त होती है
4-मौनी अमावस्या के दिन अगर काले तिलों का दान किया जाए तो समस्त ग्रह बढ़ाओ से मुक्ति प्राप्त होकर शांति प्राप्त होती है
5-चांदी का दान इस दिन करने से संतान को उन्नति एवं प्रगतिसफलता आदि प्राप्त होती है
6- इस दिन घी के दान करने से परिवार में खुशहाली भरपूर आती है
मौनी अमावस्या के दिन स्नान करने की पद्धति
1-मौनी अमावस्या के दिन अगर पानी में हल्दी डालकर स्नान किया जाए तो या बृहस्पति ग्रह को भी मजबूत करता है और शादीशुदा जिंदगी में भी खुशियां भरपूर लेकर आता हैअगर कहीं रिश्ते बन नहीं पा रही हैं या प्रेम विवाह में सुविधा हो रही हो तो इस दिन स्नान अवश्य हल्दी डालकर पानी में करना चाहिए
2--मौनी अमावस्या अवश्य के दिन अगर पानी में लौंग डालकर स्नान किया जाए जो की शनि और बुध ग्रह लौंग का प्रतिनिधित्व करते हैं इससे बुरी नजर और नकारात्मक उर्जा भी दूर हो जाती है
३- मौनी अमावस्या के दिन गंगाजी में स्नान करने से समस्त दुखों एवं का विनाश हो जाता है लेकिन किसी प्रकार से अगर आप ऐसा ना कर पाए तो अपने घर के स्नान के जल में ही थोड़ा सा गंगाजल मिला ले
मौनी अमावस्या के दिन किए जाने वाले उपाय
मौनी अमावस्या के दिन किए जाने वाले उपाय
१- मौनी अमावस्या के दिन संगम में स्नान करने से और भगवान सूर्य को जल अर्पित करने सेअश्वमेध यज्ञ के बराबर फल की प्राप्ति होती है
२-इस दिन मौन रखते हुए स्नान दान तब और शुभ व्यवहार करने सेपुण्य प्राप्त होता है और शुभ फलों की भी प्राप्ति होती है
३- मौनी अमावस्या के दिन व्रत करते हुए भगवान विष्णु के मित्रों का जाप करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है
४-इस अमावस्या तिथि को अपने पितृ जनों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सबसे उत्तम कहा गया है इस दिन ब्राह्मणों को अवश्य भोजन करना चाहिए और गाय,कुत्ते चींटी और कौवे को कुछ ना कुछ आवश्यक खिलाना चाहिए
५- इस दिन तिल,वस्त्र और धन का दान करना अत्यधिक शुभ माना गया है जिस व्यक्ति की जिंदगी में सुख संपदा आती है
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