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तुलसी माता की आरती, महत्व, लाभ और नियम
*तुलसी का महत्व (Mahatva)
तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि **धार्मिक और औषधीय महत्व वाली माता** मानी जाती हैं। जो की अत्यधिक पूजनीय है तुलसी का नाम आते ही हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि यह शुभता, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति** का प्रतीक है। उनके घर में रहने मात्र से ही घर में सकारात्मक वातावरण छा जाता है
तुलसी माता की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और रोगों से रक्षा होती है। तुलसी को “विष्णु की पत्नी” और “शुभता की जननी” भी कहा गया है।
**तुलसी की आरती करने के लाभ (Labh)
- घर में शांति** – तुलसी पूजा से परिवार में प्रेम, सौहार्द और सुख-शांति बनी रहती है। सभी लोग आपस में प्रेम भाव से रहते हैं और सकारात्मकता रहती है
- रोगों से मुक्ति** – तुलसी के पत्तों का सेवन और पूजा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। यह कई रोगों से बचाती है
- संपत्ति और समृद्धि** – तुलसी माता की कृपा से जीवन में धन और समृद्धि बढ़ती है। क्योंकि यह अपने आप में एक संपूर्ण उपासना है
- आध्यात्मिक लाभ** – तुलसी आराधना से मन का ध्यान स्थिर होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
- ग्रह दोष निवारण** – तुलसी की पूजा सूर्य और राहु-केतु दोष शांति में मदद करती है। और कुंडली में ग्रहों की स्थिति को मजबूत करती है
- सकारात्मक ऊर्जा** – तुलसी घर में सकारात्मक और शुभ ऊर्जा का संचार करती है।
*तुलसी माता की पूजा और आरती करने के नियम (Niyam)**
- समय** – सुबह सूर्योदय से पहले या संध्या समय पूजा करना शुभ है।मां के सामने दीपक जलानापूर्ण कार्य है
- स्थान** – घर में तुलसी का पौधा, तुलसी यंत्र/मूर्ति रखें।
- पूजा सामग्री** – दीपक (घी का), अक्षत, जल, हल्दी, फूल, धूप और नैवेद्य (फल/सुखा खाद्य)।
- स्नान और वस्त्र** – पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- मंत्र** – पूजा के दौरान “ॐ तुलसी माता नमः” या तुलसी मंत्र का जाप करें।
- भक्ति भाव** – माता तुलसी के प्रति श्रद्धा, विनम्रता और कृतज्ञता का भाव रखें। तुलसी मां को रखने के लिए स्वच्छता का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है मन वही निवास करती है जहां स्वच्छता और पवित्रता रहती है
**तुलसी माता की आरती**
**आरती**
जय तुलसी माता, भक्तजन सुख दाता।
तेरे चरणों में शीश नवाऊँ, दुःख हरण करता॥
सूर्य चंद्र वरण रूपिणी, विष्णु संग प्रियात्मा।
भक्तों पर कृपा करन वाली, संकट हरन कर्ता॥
जल, अक्षत और फूल चढ़ाऊँ, दीपक जलाऊँ माता।
भक्तों की हर मनोकामना, पूरी कर दो माता॥
जय तुलसी माता, भक्तजन सुख दाता।
तेरे चरणों में शीश नवाऊँ, दुःख हरण करता॥
उपाय
* तुलसी को घर में रोज़ जल दें और सूर्य की रोशनी प्राप्त कराएँ।
* तुलसी के पौधे के पास दीपक और अगरबत्ती जलाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
* तुलसी के पत्ते रोज़ सुबह खाली पेट खाने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
* तुलसी दान (पौधा देना) करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
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ठीक है
यहाँ तुलसी माता की **आरती** पूरी हिंदी में प्रस्तुत है:
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### **तुलसी माता की आरती**
**आरती**
जय तुलसी माता, भक्तजन सुख दाता।
तेरे चरणों में शीश नवाऊँ, दुःख हरण करता॥
सूर्य चंद्र वरण रूपिणी, विष्णु संग प्रियात्मा।
भक्तों पर कृपा करन वाली, संकट हरन कर्ता॥
जल, अक्षत और फूल चढ़ाऊँ, दीपक जलाऊँ माता।
भक्तों की हर मनोकामना, पूरी कर दो माता॥
जय तुलसी माता, भक्तजन सुख दाता।
तेरे चरणों में शीश नवाऊँ, दुःख हरण करता॥
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#### **आरती करते समय ध्यान रखें**
- तुलसी के पौधे के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
- जल, अक्षत, फूल और नैवेद्य अर्पित करें।
- “ॐ तुलसी माता नमः” मंत्र का जाप करें।
- आरती के बाद तुलसी के पत्तों को स्नान के बाद हल्के हाथों से छूकर अपने घर में रखें।
- नियमित पूजा और आरती करने से घर में शांति, सुख और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
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